Solar Eclipse vs Lunar Eclipse: आसमान में होने वाली खगोलीय घटनाओं में सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण हमेशा से लोगों के लिए कौतूहल का विषय रहे हैं। दोनों ही घटनाओं में सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा की स्थिति एक खास तरह से बदलती है, लेकिन इनकी अवधि में काफी अंतर होता है। पूर्ण सूर्य ग्रहण किसी एक स्थान से कुछ ही मिनटों के लिए दिखाई देता है, जबकि चंद्र ग्रहण का असर कई घंटे तक देखा जा सकता है। ब सवाल यह है कि आखिर दोनों ग्रहणों में इतना फर्क क्यों होता है? इसका सीधा संबंध इस बात से है कि किस खगोलीय पिंड की छाया पड़ रही है और वह छाया कितनी बड़ी है।
सूर्य ग्रहण में क्या होता है?
सूर्य ग्रहण उस समय बनता है जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है। ऐसी स्थिति अमावस्या के आसपास बनती है। चंद्रमा सूर्य की रोशनी को कुछ समय के लिए रोकता है और उसकी छाया पृथ्वी की सतह पर पड़ती है। द्रमा की छाया के दो प्रमुख हिस्से होते हैं। गहरे हिस्से को अंब्रा कहा जाता है। पृथ्वी पर जिस संकरे इलाके से यह छाया गुजरती है, वहां पूर्ण सूर्य ग्रहण दिखाई देता है। इसके आसपास का हल्का छाया वाला क्षेत्र पेनम्ब्रा कहलाता है, जहां सूर्य का कुछ हिस्सा ढका हुआ नजर आता है और आंशिक ग्रहण दिखाई देता है।
पूर्ण सूर्य ग्रहण कुछ मिनट का ही क्यों होता है?
इसका सबसे बड़ा कारण चंद्रमा की छाया का छोटा और सीमित क्षेत्र है। चंद्रमा पृथ्वी की तुलना में काफी छोटा है, इसलिए उसकी गहरी छाया भी पृथ्वी पर बहुत बड़े इलाके को नहीं ढक पाती। सके अलावा पृथ्वी लगातार अपनी धुरी पर घूम रही है और चंद्रमा भी अपनी कक्षा में आगे बढ़ रहा है। इन गतियों के कारण चंद्रमा की गहरी छाया पृथ्वी की सतह पर तेजी से आगे निकलती जाती है। यही वजह है कि किसी एक जगह पर पूर्ण सूर्य ग्रहण का समय बहुत कम होता है। लांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सूर्य ग्रहण की पूरी घटना सिर्फ कुछ मिनट चलती है। ग्रहण के आंशिक और पूर्ण चरणों को मिलाकर पूरी खगोलीय घटना कई घंटों तक चल सकती है। लेकिन किसी खास स्थान से पूर्ण सूर्य ग्रहण का नजारा बेहद सीमित समय के लिए ही मिलता है।
चंद्र ग्रहण कैसे बनता है?
चंद्र ग्रहण में स्थिति सूर्य ग्रहण के बिल्कुल उलट होती है। इस बार पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है। यह घटना पूर्णिमा के आसपास होती है। थ्वी सूर्य की रोशनी को रोकती है और उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है। चंद्रमा पहले पृथ्वी की हल्की छाया में प्रवेश करता है और फिर गहरी छाया वाले हिस्से तक पहुंचता है। जब पूरा चंद्रमा पृथ्वी की गहरी छाया में आ जाता है, तब पूर्ण चंद्र ग्रहण दिखाई देता है। सके बाद चंद्रमा धीरे-धीरे उस छाया से बाहर निकलता है। इस पूरी प्रक्रिया में काफी समय लग सकता है।
पृथ्वी की बड़ी छाया बनती है वजह
सूर्य और चंद्र ग्रहण की अवधि को समझने के लिए उनकी छाया की तुलना करना सबसे आसान तरीका है। र्य ग्रहण में चंद्रमा की छाया पृथ्वी पर पड़ती है। चंद्रमा छोटा होने के कारण उसकी गहरी छाया पृथ्वी पर अपेक्षाकृत संकरी पट्टी बनाती है। इस पट्टी से पृथ्वी के किसी स्थान का गुजरना कुछ ही समय में पूरा हो जाता है। दूसरी ओर, चंद्र ग्रहण के दौरान पृथ्वी की छाया चंद्रमा तक पहुंचती है। पृथ्वी का आकार चंद्रमा से काफी बड़ा है, इसलिए चंद्रमा की कक्षा के पास पृथ्वी की छाया काफी चौड़ी होती है। चंद्रमा को इस छाया के अंदर जाने, वहां से गुजरने और फिर बाहर निकलने में ज्यादा वक्त लगता है।
क्या सूर्य ग्रहण हमेशा कुछ मिनट ही रहता है?
सूर्य ग्रहण की पूरी घटना और किसी एक स्थान से दिखाई देने वाले पूर्ण ग्रहण की अवधि अलग-अलग होती है। सूर्य ग्रहण का आंशिक चरण पहले शुरू होता है और बाद में खत्म होता है। इस लिहाज से पूरी घटना कई घंटों तक जारी रह सकती है। लेकिन पूर्ण सूर्य ग्रहण, यानी जब चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक लेता है, किसी एक स्थान पर बहुत कम समय के लिए दिखाई देता है। आदर्श परिस्थितियों में पूर्ण सूर्य ग्रहण की अधिकतम अवधि करीब 7 मिनट 32 सेकंड तक हो सकती है। हालांकि ज्यादातर मामलों में पूर्णता का समय इससे काफी कम रहता है। वहीं, पूर्ण चंद्र ग्रहण की पूर्ण अवस्था एक घंटे से अधिक समय तक चल सकती है और ग्रहण के सभी चरणों को जोड़ें तो पूरी प्रक्रिया कई घंटे तक जारी रह सकती है।
चंद्र ग्रहण ज्यादा बड़े इलाके में क्यों दिखाई देता है?
दोनों ग्रहणों के बीच एक और बड़ा अंतर उनके दिखाई देने वाले क्षेत्र का है। पूर्ण सूर्य ग्रहण देखने के लिए व्यक्ति का उस संकरे रास्ते में होना जरूरी है जहां चंद्रमा की गहरी छाया पृथ्वी पर पड़ रही है। इसलिए पूर्ण सूर्य ग्रहण पृथ्वी के सीमित हिस्से से ही दिखाई देता है। चंद्र ग्रहण के दौरान स्थिति अलग होती है। पृथ्वी की रात वाली तरफ मौजूद उन बड़े इलाकों से चंद्र ग्रहण देखा जा सकता है जहां उस समय चंद्रमा आसमान में दिखाई दे रहा हो। यही वजह है कि एक ही चंद्र ग्रहण को पृथ्वी के बहुत बड़े हिस्से में रहने वाले लोग देख सकते हैं।
आखिर सूर्य ग्रहण छोटा और चंद्र ग्रहण लंबा क्यों?
सीधी भाषा में समझें तो दोनों ग्रहणों की अवधि में अंतर मुख्य रूप से छाया के आकार, उसकी गति और पृथ्वी-चंद्रमा की स्थिति** की वजह से होता है। सूर्य ग्रहण के समय चंद्रमा की अपेक्षाकृत संकरी गहरी छाया पृथ्वी की सतह पर तेजी से आगे बढ़ती है। इसलिए किसी एक जगह पर पूर्ण सूर्य ग्रहण कुछ मिनटों तक ही दिखाई देता है। इसके विपरीत चंद्र ग्रहण में चंद्रमा पृथ्वी की कहीं ज्यादा चौड़ी छाया से होकर गुजरता है। उसे इस छाया को पार करने में अधिक समय लगता है। यही वजह है कि चंद्र ग्रहण की अवधि पूर्ण सूर्य ग्रहण की तुलना में काफी लंबी होती है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. loksatya इसकी पुष्टि नहीं करता है।