UP में वैसे तो एक से बढ़कर सीनियर IAS अफसर हैं, लेकिन योगी सरकार ने नए DGP को लेकर कशमकश में है, क्योंकि पिछले साल सरकार ने अपने हिसाब से DGP को लेकर नए नियम बनाए थे, नई नियमावली को योगी कैबिनेट ने भी मुहर लगा दी है, लेकिन इसके बाद भी UP को फुल टाइम DGP अभी तक नहीं मिल सका है, आखिर ऐसा क्या पेंच है जिसके योगी सरकार वो कमेटी नहीं बना पाई जो नए डीजीपी का नाम तय कर सके. इस आर्टिकल में आपको बताते हैं.
UP को नहीं मिल पाया फुल टाइम डीजीपी !
दरअसल योगी सरकार ने डीजीपी तय करने के लिए केंद्र को नाम भेजने वाले झंझट से बचने के लिए नियम बदले थे. लेकिन उन पर अमल अब तक नहीं कर पाई. रिपोर्ट्स की मानें तो डीजीपी चयन के लिए नवंबर 2024 में योगी सरकार ने नियम बदला था जिसमें कैबिनेट ने चयन नियमावली 2024 को मंजूरी दी थी. नए नियम के मुताबिक डीजीपी की नियुक्ति राज्य कर सकेगा. नए नियम के तहत यूपीएससी को केंद्र के पास पैनल नहीं भेजना पड़ेगा. नए नियम के मुताबिक डीजीपी का कार्यकाल 2 साल का रहेगा. डीजीपी तय करने के लिए पांच सदस्य कमेटी का प्रस्ताव तय हुआ है हालांकि नई नियमावली बनाने के बावजूद यूपी को फुल टाइम डीजीपी नहीं मिल पाया.
केंद्र सरकार को भेजा सेवा विस्तार का प्रस्ताव
राज्य के सबसे टॉप पदों पर अपने हिसाब से अधिकारियों की तैनाती करने के लिए नियम बदलने वाला यूपी चौथा राज्य है. यूपी से पहले आंध्र प्रदेश, पंजाब और तेलंगाना सरकार ने अपने मन का डीजीपी नियुक्त करने के लिए ऐसी ही नियमावली बना रखी है. नियमावली में साफ तौर पर लिखा है अब डीजीपी की नियुक्ति राज्य में बेहतर कार्य करने वाले आईपीएस अफसर के सेवा रिकॉर्ड और उनके अनुभव के आधार पर होगी. फुल टाइम डीजीपी नियुक्त करने के लिए उन्हीं आईपीएस अफसरों को प्राथमिकता दी जाएगी जिनका कम से कम 6 महीने का कार्यकाल बचा हो. इसके अलावा डीजीपी की नियुक्ति कम से कम 2 साल के लिए की जाएगी. हालांकि अगर राज्य सरकार डीजीपी के कामकाज से असंतुष्ट है तो वह सेवा के दौरान उन्हें भी पद से हटा सकती है लेकिन नए नियम बनाने के बावजूद या यूं कहें कि परंपरागत नियमावली में बदलाव के बाद भी यूपी को फुल टाइम डीजीपी नहीं मिल सका. खबर है कि योगी सरकार ने मौजूदा कार्यवाहक डीजीपी प्रशांत कुमार को सेवा विस्तार देने के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा है. लेकिन उस पर केंद्र की ओर से अब तक कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिला.
UP में फुल टाइम DGP को लेकर संशय !
नियम और योग्य अधिकारी होने के बावजूद यूपी में फुल टाइम डीजीपी को लेकर फिलहाल संशय बना हुआ है. अगर यूपी में फुल टाइम डीजेपी की बात करें तो 1 जुलाई 2021 को इस पद पर मुकुल गोयल की तैनाती हुई थी. लेकिन मई 2022 में अपने कर्तव्यों का ठीक से पालन ना करने की वजह से उन्हें इस पद से हटा दिया गया. इसके बाद मई 2022 में ही डीजी इंटेलिजेंस डीएस चौहान को कार्यवाहक डीजीपी के तौर पर तैनात किया गया तब से यूपी को पूर्णकालिक डीजीपी नहीं मिल पाया. मुकुल गोयल के बाद कार्यवाहक डीजीपी के तौर पर डी एस चौहान, राजकुमार विश्वकर्मा, विजय कुमार और प्रशांत कुमार ने पद संभाला. प्रशांत कुमार 31 मई 2025 को रिटायर हो जाएंगे. अब देखना ये होगा कि योगी सरकार इस बार पूर्णकालिक डीजीपी तय कर पाती है या प्रदेश को एक बार फिर कार्यवाहक डीजीपी ही मिलेगा।