
Court Marriage New Rule : भारत में कोर्ट मैरिज यानी विशेष विवाह अधिनियम, 1954 (Special Marriage Act, 1954) के तहत होने वाली शादी, एक कानूनी प्रक्रिया है जिसमें विवाह बिना किसी धार्मिक रीति-रिवाज के केवल रजिस्ट्रेशन के माध्यम से संपन्न होता है। यह प्रक्रिया उन लोगों के लिए बेहद सहायक है जो अंतरजातीय, अंतरधार्मिक या पारिवारिक विरोध के बावजूद विवाह करना चाहते हैं। लेकिन हाल ही में लोगों के बीच यह भ्रम फैल गया है कि अब कोर्ट मैरिज के लिए गवाह के रूप में घर का कोई "blood relation" यानी रक्त संबंधी होना जरूरी हो गया है. आइए जानते हैं कि इसमें कितनी सच्चाई है और इसका कानूनी आधार क्या है.
क्या वाकई घर का कोई रक्त संबंधी गवाह होना अनिवार्य है?
नहीं, भारत के किसी भी केंद्रीय कानून या विशेष विवाह अधिनियम में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो कहता हो कि कोर्ट मैरिज के लिए गवाह के रूप में घर का कोई रक्त संबंधी (जैसे माता-पिता, भाई, बहन) होना अनिवार्य है। कानून केवल यह कहता है कि विवाह के समय तीन गवाहों की उपस्थिति आवश्यक है. ये गवाह किसी भी व्यक्ति को बनाया जा सकता है — जैसे दोस्त, पड़ोसी, सहकर्मी या रिश्तेदार। लेकिन यह जरूरी नहीं कि वे परिवार के सदस्य हों या रक्त संबंधी ही हों.
फिर यह अफवाह क्यों फैली?
1. स्थानीय अधिकारियों की प्रक्रिया:
कुछ जगहों पर विवाह अधिकारी या नगर निगम कार्यालय के कर्मचारी पारिवारिक गवाहों को प्राथमिकता देते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि इससे विवाह में पारदर्शिता और सामाजिक स्वीकृति बढ़ती है. लेकिन यह कोई कानून नहीं है, सिर्फ एक प्रशासनिक सुविधा हो सकती है.
2. परिवार की सहमति का दबाव:
कई बार परिवार विरोध करता है, तो अधिकारी यह जानना चाहते हैं कि क्या शादी जबरदस्ती तो नहीं हो रही. ऐसे में यदि कोई परिजन मौजूद हो तो उन्हें संतोष होता है. लेकिन यह भी कानून की आवश्यकता नहीं, बल्कि सामाजिक स्तर पर संतुलन बनाने की कोशिश होती है.
3. सोशल मीडिया और अफवाहें:
सोशल मीडिया पर अक्सर अधूरी या भ्रामक जानकारी फैल जाती है जिससे लोग समझते हैं कि नया कानून आ गया है. जबकि वास्तव में ऐसा कोई अधिनियम या सरकारी आदेश नहीं आया है.
कानून में गवाह की शर्तें क्या हैं?
गवाह बनने के लिए केवल कुछ बुनियादी शर्तें होती हैं:
वह व्यक्ति भारत का नागरिक होना चाहिए
उसकी उम्र 18 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए
उसके पास कोई सरकारी पहचान पत्र (जैसे आधार कार्ड, वोटर आईडी, पासपोर्ट आदि) होना चाहिए
वह विवाह के समय स्वयं उपस्थित होना चाहिए
गवाह की भूमिका होती है यह प्रमाणित करना कि विवाह में दोनों पक्षों की सहमति थी, और शादी कानूनी रूप से संपन्न हुई.
कोर्ट मैरिज के लिए गवाह के रूप में घर का कोई रक्त संबंधी होना जरूरी नहीं है. यह सिर्फ एक अफवाह या कुछ स्थानों की प्रशासनिक मांग हो सकती है, लेकिन भारत के विवाह कानून में ऐसा कोई अनिवार्य नियम नहीं है. यदि कोई अधिकारी इस तरह की मांग करता है, तो आप उन्हें साफ कह सकते हैं कि कानून में इसकी आवश्यकता नहीं है और आप गवाह के रूप में अपने किसी भी विश्वसनीय व्यक्ति को ला सकते हैं.
सलाह
यदि आप कोर्ट मैरिज कर रहे हैं और आपके पास परिवार का समर्थन नहीं है, तो घबराने की जरूरत नहीं. अपने साथ तीन विश्वसनीय वयस्क गवाह लेकर जाएं — वे आपके दोस्त, सहकर्मी, या जानकार हो सकते हैं. शादी को रोकने का कोई वैध आधार नहीं होता यदि दस्तावेज़ पूरे हों और प्रक्रिया सही तरीके से की गई हो.