समय से पहले आ सकता है मानसून : देशभर में भीषण गर्मी के बीच राहत की खबर सामने आई है. भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी IMD ने संकेत दिए हैं कि इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून तय समय से पहले केरल पहुंच सकता है। मौसम विभाग के अनुसार मानसून के 26 मई के आसपास केरल में दस्तक देने की संभावना है, जबकि इसकी सामान्य तारीख 1 जून मानी जाती है.
अगर मानसून वास्तव में 26 मई को पहुंचता है, तो यह लगातार तीसरा साल होगा जब मानसून सामान्य समय से पहले केरल पहुंचेगा. मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यह पिछले कई दशकों में सबसे शुरुआती मानसून आगमन में शामिल हो सकता है.
क्या टूट सकता है 35 साल पुराना रिकॉर्ड?
मौसम विभाग के पुराने आंकड़ों के अनुसार केरल में मानसून का सबसे जल्दी आगमन 23 मई 2009 को दर्ज किया गया था। वहीं 2025 में मानसून 24 मई को पहुंचा था, जिसे 16 वर्षों में सबसे जल्दी आगमन माना गया. हालांकि इस बार 26 मई की संभावित तारीख रिकॉर्ड नहीं तोड़ेगी, लेकिन यह पिछले 35 वर्षों के सबसे शुरुआती मानसून आगमन में जरूर शामिल हो सकती है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में बन रहे अनुकूल सिस्टम इसकी बड़ी वजह हैं.
IMD ने क्या कहा?
IMD ने बताया कि दक्षिण अंडमान सागर, निकोबार द्वीप समूह और बंगाल की खाड़ी के कई हिस्सों में मानसून तेजी से आगे बढ़ रहा है. विभाग के मुताबिक अगले कुछ दिनों में इसके और मजबूत होने की संभावना है. मौसम विभाग ने यह भी कहा कि केरल में मानसून की आधिकारिक घोषणा के लिए कुछ तय मानक होते हैं. इनमें लगातार बारिश, हवाओं की दिशा और बादलों की स्थिति जैसी परिस्थितियां शामिल हैं.
किसानों के लिए राहत की उम्मीद
मानसून के जल्दी आने की खबर किसानों के लिए राहत लेकर आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय से पहले बारिश होने पर खरीफ फसलों की बुवाई जल्दी शुरू हो सकती है। इससे धान, मक्का और सोयाबीन जैसी फसलों को फायदा मिल सकता है. हालांकि मौसम वैज्ञानिक यह भी चेतावनी दे रहे हैं कि जल्दी मानसून आने का मतलब पूरे सीजन में सामान्य से ज्यादा बारिश होना जरूरी नहीं है. कई बार शुरुआती बारिश के बाद लंबे ड्राई स्पेल भी देखने को मिलते हैं.
कई राज्यों में बढ़ेगी बारिश
IMD ने केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में अगले कुछ दिनों के दौरान भारी बारिश की संभावना जताई है। कुछ जिलों में येलो अलर्ट भी जारी किया गया है. अब देशभर की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या मानसून वास्तव में तय तारीख से पहले पहुंचकर नया इतिहास बनाएगा या नहीं.