NEET UG 2026: नीट यूजी परीक्षा पेपर लीक के बाद देशभर में छात्र सड़क पर उतरे और जमकर विरोध प्रदर्शन किया, जिसके बाद आखिरकार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा। वहीं इस पूरे विवाद के बाद सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक बड़ा बयान दिया है कि नीट यूजी को अब इंजीनियरिंग (JEE) की तर्ज पर दो चरणों में कराने पर विचार कर रहा है। इंजीनियरिंग की तरह मेडिकल परीक्षा भी मेन्स और फिर एडवांस्ड की तर्ज पर हो सकती है। साथ ही इस परीक्षा को पेन पेपर मोड से हटाकर कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट बनाने पर भी सक्रिय रूप से विचार किया जा रहा है।
8 बड़ी परीक्षाओं में से 7 पहले ही कंप्यूटर-बेस्ड हो चुकी
सरकार ने यह भी साफ किया कि अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। इस पर अंतिम फैसला नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता वाली हाई-पावर्ड टास्क फोर्स की सिफारिशों के बाद ही लिया जाएगा। सरकार ने बताया कि NTA की 8 बड़ी परीक्षाओं में से 7 पहले ही कंप्यूटर-बेस्ड हो चुकी हैं। अब सिर्फ नीट यूजी परीक्षा ही पेन पेपर मोड में आयोजित होती है। वहीं JEE (Main) से लेकर CUET (UG), CUET (PG), UGC-NET और CSIR-NET तक सभी परीक्षा का आयोजन CBT मोड में होता है।
नीट को बदलना आसान नहीं
NEET को बदलना इतना आसान नहीं है, क्योंकि इस परीक्षा में 22 लाख से अधिक छात्र रजिस्टर करते हैं। एक साथ CBT मोड में इंफ्रास्ट्रक्चर और कंप्यूटर सेंटर जुटाना आसान नहीं है। वहीं, नीट में बड़ी संख्या में ग्रामीण इलाकों के छात्र और महिला उम्मीदवार शामिल होती हैं। जिन्हें कंप्यूटर आधारिक परीक्षा के अभ्यास की जरूरत होगी। इसके अलावा यह MBBS, BDS, AYUSH, वेटरनरी और नर्सिंग समेत कई कोर्सों का गेट वे है।
क्या है नीट टू-स्टेज मॉडल?
नीट यूजी केवल एक ही चरण में पेन पेपर मोड पर आयोजित होती है। अगर एक बार पेपर लीक हो जाए, तो पूरी परीक्षा रद्द करनी पड़ती है। लेकिन टू-स्टेज मॉडल में इसे दो भागों में बांटा जाएगा। पहले चरण में एक स्क्रीनिंग टेस्ट होगा, जो कंप्यूटर बेस्ट मोड में आयोजित होगा। इसके नंबरों के आधार पर छात्र दूसरे चरण के लिए क्वालीफाई करेंगे। वहीं, दूसरे चरण में इसमें केवल शॉर्टलिस्ट हुए सीमित छात्र ही शामिल होंगे, यह चरण ज्यादा सुरक्षित और कड़ी निगरानी में होगा। अंतिम मेरिट इसी के आधार पर बनेगी।
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कैसे रुकेगा पेपर लीक ?
पेन-पेपर की तुलना में CBT में पेपर लीक की संभावना बहुत कम होती है। दूसरे चरण की परीक्षा में बेहम कम छात्र होंगे, जिससे परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा और निगरानी कई गुना सख्त की जा सकेगी। कंप्यूटर पर हर छात्र को अलग सेट मिल सकता है, जिससे एक पेपर लीक होने पर भी पूरी परीक्षा प्रभावित नहीं होती।
सरकार ने कोर्ट को क्या बताया
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह पहले ही कई नए सुरक्षा इंतजाम कर चुकी है। नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में टास्क फोर्स बनाई गई है। इसमें पूर्व ISRO चीफ एस. सोमनाथ, पूर्व IB चीफ तपन डेका, IIT मद्रास के डायरेक्टर वी. कामाकोटि और पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल जैसे दिग्गज शामिल है। पेपर लीक में शामिल गिरोहों और दोषियों के लिए नए कड़े कानून सख्त सजा और फास्ट-ट्रैक कोर्ट का प्रावधान भी लाया गया है। प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के लिए GPS-टैग्ड स्टील ट्रंक में CAPF एस्कॉर्ट करती है। परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक, फेशियल रिकॉग्निशन और मेटल डिटेक्टर से जांच होती है।