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Weather in 2025- 26 : सर्दियाँ यानी दिसंबर से फरवरी का मौसम भारत में अपने साथ न केवल ठंडक लाती हैं, बल्कि यह कृषि, स्वास्थ्य, ऊर्जा उपयोग और जीवनशैली पर भी गहरा असर डालती है. यदि इस वर्ष सर्दी सामान्य से ज़्यादा पड़ी, तो इसका मतलब होगा लोगों को अधिक तत्फरता, बिजली और हीटिंग संसाधनों की मांग बढ़ना, और संभवतः स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का सामना करना. ऐसे में यह जानना कि मौसम विभाग और वैज्ञानिक इस सर्दी को लेकर क्या कह रहे हैं, और ठंड बढ़ने की संभावित वजहें क्या हो सकती हैं, बहुत महत्वपूर्ण है.
2025 की सर्दी: अनुमान और चिह्न
1. कड़क सर्दी की संभावना
कुछ रिपोर्टों ने चेतावनी दी है कि इस वर्ष भारत में कड़ाके की ठंड पड़ सकती है, विशेष रूप से La Niña की वापसी की संभावना के चलते। यदि La Niña सक्रिय होती है, तो इससे पश्चिमी विक्षोभ और ऊपरी वायुमंडलीय स्थितियाँ अनुकूल हो सकती हैं, जिससे ठंडे पश्चिमी हवाएँ अधिक सक्रिय हो सकती हैं.
2. मिथ्यापूर्ण अनुमान
वहीं, कुछ पूर्वानुमान यह भी कहते हैं कि अधिकांश भागों में न्यूनतम तापमान सामान्य या उससे ऊपर रह सकते हैं, और शीतलहर (cold waves) के दिन सीमित हो सकते हैं.
3. जनवरी–मार्च में तापमान रुझान
मौसम विभाग के अनुसार, जनवरी‑मार्च के बीच, विशेषकर उत्तरी भारत में न्यूनतम तापमान में सामान्य से थोड़ी ऊँचाई रहने की संभावना है. इसलिए, कुल मिलाकर यह स्पष्ट नहीं है कि सर्दी इस वर्ष हर जगह “बहुत ज़्यादा” पड़ेगी, लेकिन कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक ठंड की संभावना को नकारा नहीं जा सकता.
ठंड ज़्यादा पड़ने के संभावित कारण
अगर 2025‑26 में सर्दियाँ सामान्य से अधिक ठंडी पड़ीं, तो इसके पीछे निम्न कारण हो सकते हैं:
La Niña प्रभाव
La Niña की स्थिति प्रशांत महासागर में समुद्री तापमान को सामान्य से नीचे रखती है, और यह वैश्विक वायुमंडलीय धाराओं में बदलाव लाती है। भारत में La Niña सक्रिय होने पर ठंड और सर्द हवाओं की प्रवणता बढ़ सकती है.
पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances)
सर्दियों में पश्चिमी विक्षोभ की गतिविधि ऊँचाई वाले क्षेत्रों तक ठंड पहुँचाती है। यदि ये विक्षोभ इस वर्ष ज़्यादा तीव्र या आवृत्त हों, तो ठंड अधिक महसूस की जा सकती है.
भौगोलिक और स्थानीय कारक
– ऊँचाई और पठारी इलाकों में ठंड अधिक तीव्र होती है.
– तापमान विरूपण (Temperature Anomalies) — यदि वर्ष के प्रारंभ में तापमान सामान्य से ऊँचा रहा हो, तो शेष वर्ष में अधिक बदलाव हो सकते हैं।
– मौसम परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग का असममिति असर — वैश्विक स्तर पर तापमान बढ़ने से प्रतिकूल वायुमंडलीय पैटर्न बन सकते हैं, जिससे कुछ स्थानों पर ठंड ज़्यादा पड़ सकती है।
न्यून वर्षा और कोहरा
यदि सर्दियों से पहले वर्षा कम हुई हो या जमीन अपेक्षाकृत शुष्क हो, तो रात को विकिरण ठंड अधिक होने की संभावना बढ़ जाती है। साथ ही, कोहरे की स्थिति तापमान को और नीचे ले जाने में मदद कर सकती है.