पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच सरकार ने डीजल और एटीएफ पर फिर से निर्यात शुल्क लगा दिया है। डीजल पर 21.50 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ पर 29.50 रुपये प्रति लीटर का टैक्स लागू किया गया है, जिससे ऊर्जा बाजार में हलचल मच गई है।
रिलायंस को मिली बड़ी राहत
हालांकि इस फैसले का असर रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की एसईजेड रिफाइनरी पर नहीं पड़ेगा। सरकार ने साफ किया है कि विशेष आर्थिक क्षेत्र में स्थित रिफाइनरियों को न्यायिक फैसलों के कारण इस टैक्स से छूट मिली हुई है, जिससे कंपनी को बड़ी राहत मिली है।
क्या है छूट की असली वजह
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, अदालतों के पुराने फैसलों के चलते एसईजेड में आने वाली इकाइयों पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लागू नहीं होता। इसी कारण रिलायंस की रिफाइनरी इस टैक्स के दायरे से बाहर रखी गई है, जिससे नीति में स्पष्टता आई है।
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क्यों लगाया गया टैक्स
सरकार ने यह कदम वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में आई अनिश्चितता को देखते हुए उठाया है। इसका मकसद यह है कि रिफाइनर कंपनियां ज्यादा निर्यात करने के बजाय घरेलू बाजार को प्राथमिकता दें, ताकि देश में ईंधन की उपलब्धता बनी रहे और कीमतों पर नियंत्रण रखा जा सके।
रिलायंस के कारोबार पर असर
रिलायंस देश की सबसे बड़ी ईंधन निर्यात करने वाली कंपनियों में से एक है। जामनगर स्थित उसकी रिफाइनरियों में बड़े पैमाने पर एटीएफ और डीजल का उत्पादन होता है, जिसका एक बड़ा हिस्सा विदेशों में भेजा जाता है। ऐसे में टैक्स से छूट मिलना कंपनी के लिए अहम माना जा रहा है।
शेयर बाजार में दिखा असर
सरकार के इस फैसले के बाद कंपनी के शेयरों में गिरावट देखी गई। बाजार में निवेशकों की चिंता के चलते शेयर कीमत में गिरावट आई और कंपनी का मार्केट कैप भी प्रभावित हुआ। हालांकि आने वाले समय में नीति स्पष्ट होने के बाद स्थिति स्थिर होने की उम्मीद जताई जा रही है।