Fuel Windfall Tax : केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एयर टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में बढ़ोतरी कर दी है। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने की उम्मीद के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है। सरकार का कहना है कि इस कदम का मकसद घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना है।
किस ईंधन पर कितना बढ़ा टैक्स?
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाला शुल्क 2.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 3.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं डीजल के निर्यात पर कुल शुल्क 15.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 25.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इसके अलावा एयर टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर विंडफॉल टैक्स 14.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 22 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।
आम लोगों पर पड़ेगा या नहीं असर?
सरकार के इस फैसले का घरेलू उपभोक्ताओं पर सीधा असर नहीं पड़ेगा। यह टैक्स केवल ईंधन के निर्यात पर लगाया जाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक मुनाफे के लिए घरेलू आपूर्ति को प्रभावित न करें। इससे देश के भीतर पेट्रोल, डीजल और ATF की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलती है।
ये भी पढ़ें : घरेलू बाजार ने बढ़त के साथ की शुरुआत, Sensex चढ़ा, Nifty में दिखी शुरुआती कमजोरी
क्या होता है विंडफॉल टैक्स?
जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और ईंधन की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं, तब रिफाइनरियां निर्यात से अधिक मुनाफा कमाने लगती हैं। ऐसी स्थिति में सरकार अतिरिक्त लाभ पर विंडफॉल टैक्स लगाती है, ताकि कंपनियां घरेलू बाजार की बजाय केवल निर्यात पर ध्यान न दें। वहीं जब वैश्विक कीमतें कम हो जाती हैं, तो सरकार इस टैक्स को घटाने या समाप्त करने का फैसला भी ले सकती है।
पहली बार कब लागू हुआ था यह टैक्स?
भारत ने पहली बार 1 जुलाई 2022 को विंडफॉल टैक्स लागू किया था। उस समय रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया था। बाद में दिसंबर 2024 में इस टैक्स को समाप्त कर दिया गया था। हालांकि मार्च 2026 में अंतरराष्ट्रीय हालात और तेल कीमतों में फिर तेजी आने के बाद सरकार ने इसे दोबारा लागू कर दिया।