संसद के शीतकालीन सत्र में मंगलवार को चुनाव प्रक्रिया, SIR की विश्वसनीयता, EVM पर उठते प्रश्न और मतदाता अधिकारों जैसे मुद्दों पर गरमागरम बहस देखने को मिली। विपक्षी नेताओं ने सरकार और चुनाव आयोग पर कई गंभीर सवाल खड़े किए। अखिलेश यादव और मनीष तिवारी ने SIR, EVM, मतदाता सूची और सरकारी संसाधनों के उपयोग को लेकर तीखी आपत्ति जताई, जबकि सत्ता पक्ष ने विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक हताशा बताया।
रामपुर उपचुनाव पर अखिलेश यादव के आरोप
लोकसभा में विपक्ष के नेता अखिलेश यादव ने रामपुर उपचुनाव के दौरान कथित रूप से पुलिस द्वारा मतदाताओं को घरों से बाहर न निकलने देने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि प्रशासन ने वोटिंग प्रक्रिया को प्रभावित किया, जिसके कारण वहां पहली बार भाजपा को जीत मिली। उन्होंने कहा कि SIR के नाम पर कई राज्यों में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की घटनाएं सामने आई हैं।
चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव की मांग
अखिलेश यादव ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को “ज्यादा पारदर्शी” बनाने की मांग की। उन्होंने EVM पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि कई देशों में, खासकर जर्मनी में, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग को स्वीकार नहीं किया जाता। उन्होंने बैलेट पेपर की वापसी का समर्थन करते हुए कहा कि मतदाता का भरोसा लोकतंत्र की बुनियाद है।
मनीष तिवारी का SIR पर सीधा हमला
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने SIR को अवैध करार देते हुए इसे तत्काल बंद करने की मांग की। उन्होंने दावा किया कि SIR के लिए कोई कानूनी प्रावधान मौजूद नहीं है। तिवारी ने आरोप लगाया कि सरकारी पैसों का दुरुपयोग कर डायरेक्ट कैश ट्रांसफर के जरिए चुनाव प्रभावित किए जा रहे हैं और यह लोकतांत्रिक ढांचे के लिए खतरनाक है।
आर्थिक बोझ और लोकतंत्र पर खतरे की चेतावनी
अपनी बात रखते हुए मनीष तिवारी ने कहा कि कई राज्य केवल ब्याज चुकाने के लिए कर्ज लेने को मजबूर हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि चुनावी लाभ के लिए वित्तीय नीतियों का दुरुपयोग जारी रहा तो देश गंभीर आर्थिक संकट में फंस सकता है। उन्होंने पूछा, “कैसा मुल्क बनाना चाहते हैं आप, जहां सरकारें पैसे बांटकर जीतती रहें?”
सत्ता पक्ष का पलटवार: विपक्ष को बताया भ्रमित
बहस के दौरान भाजपा के नेताओं ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज किया। संजय जायसवाल ने कहा कि बिहार में हार के बाद भी विपक्ष आत्मचिंतन को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि SIR का मुद्दा विपक्ष की “राजनीतिक कथा” बन चुका है और ईवीएम पर सवाल उठाकर जनता को गुमराह किया जा रहा है। अमित शाह ने वंदे मातरम को लेकर विपक्ष की टिप्पणियों को भी गलत बताया और कहा कि राष्ट्रीय मूल्यों का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए।