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World Lung Cancer Day 2025: हर साल 1 अगस्त को विश्व लंग कैंसर दिवस के रूप में मनाया जाता है। लग्स कैंसर यानि फेफड़ों का कैंसर जानलेवा होता है। पिछले कुछ सालों में लंग कैंसर के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। फेफड़ों के कैंसर की जल्दी पहचान नहीं हो पाती है। इसलिए समय रहते इलाज भी नहीं हो पाता है। लेकिन फेफड़ों के कैंसर की पहचान और इलाज में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एक अहम भूमिका निभा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि AI आधारित प्रेडिक्टिव हेल्थ सिस्टम लंग कैंसर की शुरुआती पहचान, रिस्क असेसमेंट और ट्रीटमेंट की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
AI बना डॉक्टरों का सहायक
डॉक्टर पुनीत गुप्ता, चेयरमैन, ऑनकोलॉजी सर्विसेज, एशियन हॉस्पिटल के अनुसार, आर्टिफिशल इंटेलिजेंस अब डॉक्टरों का सहायक बन गया है, जो मेडिकल डेटा को तेजी से प्रोसेस करके संभावित लक्षणों का विश्लेषण करता है। इससे हम कैंसर की पहचान पहले स्टेज से ही कर सकते हैं। AI आधारित तकनीक सीटी स्कैन और एक्स-रे इमेजिंग को उच्च स्तर की सटीकता से विश्लेषित कर सकती है। यह फेफड़ों में मौजूद गांठों और अन्य सूक्ष्म असामान्यताओं की पहचान कर सकती है। जो सामान्य रूप से नजर नहीं आतीं। डॉ. गुप्ता ने बताया कि हाई रिस्क ग्रुप के मरीजों के लिए एआई-आधारित स्क्रीनिंग प्रोग्राम शुरुआती चरण में कैंसर की उपस्थिति की पहचान कर सकता है, जिससे समय रहते इलाज शुरू किया जा सकता है।
AI कैसे करता है काम?
आर्टिफिशल इंटेलिजेंस मशीन लर्निंग की वजह से मरीज के फेफड़ों की सीटी स्कैन, एक्स-रे या PET स्कैन इमेज को पढ़कर पैटर्न को पहचानता है, जो आम तौर पर आंखों से छूट सकते हैं। ये सिस्टम हजारों केस डेटा से सीखकर यह पता लगाते हैं कि कौन-सी गाठें कैंसर की हो सकती हैं और किन पर नजर रखनी चाहिए। वहीं, डॉक्टरों का कहना है कि जहां रेडियोलॉजिस्ट को एक-एक स्कैन पढ़ने में समय लगता है, वहीं आर्टिफिशल इंटेलिजेंस मिनटों में सैकड़ों स्कैन की तुलना करके रिपोर्ट निकाल सकता है।
भारत में आर्टिफिशल इंटेलिजेंस की स्थिति
भारत में अभी आर्टिफिशल इंटेलिजेंस आधारित कैंसर स्कैनिंग शुरुआती दौर में है, कुछ प्राइवेट अस्पतालों ने इसका प्रयोग शुरू किया है, लेकिन सरकारी स्तर पर भी आर्टिफिशल इंटेलिजेंस आधारित कैंसर स्क्रीनिंग को प्राथमिकता दिए जाने की मांग की जा रही है।