मध्य प्रदेश के नक्सल प्रभावित बालाघाट जिले से बड़ी खबर सामने आई है। यहां पहली बार किसी महिला नक्सली ने हथियार डालकर मुख्यधारा में शामिल होने का फैसला किया है। करीब 12 वर्षों से सक्रिय रही यह महिला माओवादी सुनीता, एमएमसी जोन प्रभारी रामधेर की हथियारबंद गार्ड के रूप में काम करती थी। मिशन 2026 के तहत यह सरेंडर सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, जिसने नक्सल उन्मूलन अभियान को नई दिशा दी है।
12 साल बाद डाले हथियार
छत्तीसगढ़ के बीजापुर की रहने वाली सुनीता ने 1 नवंबर को बालाघाट जिले के चौरिया क्षेत्र में बन रहे हॉक फोर्स कैंप में आत्मसमर्पण किया। वह नक्सली संगठन में 12 साल से सक्रिय थी और अपने दलम के शीर्ष नेता रामधेर की गार्ड के रूप में काम कर रही थी। फरवरी 2013 में आखिरी बार बालाघाट में नक्सली बीरसिंह ने सरेंडर किया था। इस लिहाज से सुनीता का आत्मसमर्पण सुरक्षा एजेंसियों के लिए ऐतिहासिक घटना बन गया है।
मुख्यधारा में लौटने का साहसिक कदम
महिला नक्सली ने हॉक फोर्स के सहायक सेनानी के समक्ष आत्मसमर्पण किया। अब उसे पुनर्वास योजना के तहत मुख्यधारा में शामिल किया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक, सुनीता ने समाज की मुख्यधारा में लौटकर शांति और विकास के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया है। यह कदम अन्य सक्रिय नक्सलियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन सकता है।
मिशन 2026 को मिली नई ऊर्जा
राज्य में चल रहे मिशन 2026 का उद्देश्य नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म कर प्रभावित इलाकों में शांति बहाल करना है। इस मिशन के तहत सुरक्षा बल नक्सलियों को आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित कर रहे हैं। सरेंडर किए गए टॉप नक्सल लीडर्स की तस्वीरें अब शिविरों और गांवों में लगाई जा रही हैं ताकि बाकी नक्सली भी संवाद और विश्वास की प्रक्रिया में शामिल हों।
शांति की दिशा में बड़ा कदम
बालाघाट में महिला नक्सली का सरेंडर न सिर्फ सुरक्षा एजेंसियों के लिए सफलता है, बल्कि यह इस बात का संकेत भी है कि नक्सलवाद अब कमजोर पड़ने लगा है। सरकार की रणनीति और जनसहयोग के चलते अब विकास की राह पर लौटने का माहौल तैयार हो रहा है।