केंद्रीय बजट 2026 में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने पर खास फोकस देखने को मिला। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने महिला उद्यमिता, स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए कई अहम घोषणाएं कीं। खासतौर पर ग्रामीण और पहली बार व्यवसाय शुरू करने वाली महिलाओं के लिए वित्तीय सहायता, मेंटरशिप और इक्विटी सपोर्ट को लेकर बड़े फैसले लिए गए हैं, जो महिलाओं को नौकरी मांगने वाली नहीं बल्कि रोजगार देने वाली बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकते हैं।
महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने पर सरकार का जोर
बजट 2026 में महिला उद्यमिता को आर्थिक विकास का अहम आधार माना गया है। सरकार का मानना है कि अगर महिलाओं को संसाधन, पूंजी और सही मार्गदर्शन मिले तो वे स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक मजबूत उद्यम खड़े कर सकती हैं। इसी सोच के तहत महिलाओं के लिए विशेष योजनाओं का विस्तार किया गया है, जिससे उनका व्यवसायिक आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ेगी।
ग्रामीण महिलाओं के लिए विशेष पहल
ग्रामीण इलाकों की महिलाओं को ध्यान में रखते हुए सामुदायिक स्व-सहायता समूह आधारित उद्यमों को बढ़ावा देने की घोषणा की गई है। यह पहल लखपति दीदी योजना की तर्ज पर तैयार की गई है, जिसमें महिला-नेतृत्व वाले समूहों को संगठित कर उन्हें स्थायी आजीविका से उद्यम स्वामित्व की ओर ले जाया जाएगा। इससे गांवों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
MSME सेक्टर में महिलाओं के लिए 10,000 करोड़ का फंड
महिला उद्यमियों के लिए MSME क्षेत्र में 10,000 करोड़ रुपये का SME ग्रोथ फंड घोषित किया गया है। यह फंड महिलाओं को इक्विटी सपोर्ट उपलब्ध कराएगा, जिससे वे बिना अत्यधिक कर्ज के अपने व्यवसाय को आगे बढ़ा सकेंगी। माना जा रहा है कि इससे महिला-स्वामित्व वाले स्टार्टअप और छोटे उद्योगों को नई मजबूती मिलेगी।
पहली बार उद्यम शुरू करने वाली महिलाओं को राहत
पहली बार कारोबार शुरू करने वाली महिलाओं के लिए टर्म लोन की सुविधा को आसान बनाया गया है। इसके साथ ही मेंटरशिप प्रोग्राम का दायरा बढ़ाया गया है, ताकि अनुभवी पेशेवरों का मार्गदर्शन नए उद्यमियों को मिल सके। यह कदम असफलता के जोखिम को कम करने और व्यवसाय को स्थिरता देने में मदद करेगा।
आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा संकेत
बजट 2026 की ये घोषणाएं साफ संकेत देती हैं कि सरकार महिलाओं को केवल योजनाओं की लाभार्थी नहीं, बल्कि आर्थिक विकास की भागीदार बनाना चाहती है। वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और नेटवर्किंग के जरिए महिलाओं को मजबूत मंच देने की कोशिश की गई है, जिससे आने वाले वर्षों में महिला उद्यमिता देश की अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभा सके।