Women Health : महिलाओं की सेहत को सिर्फ पीरियड और हार्मोन से जोड़कर देखना सही नहीं है। उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कई तरह के बदलाव आते हैं, जिन पर ध्यान देना जरूरी है। स्तनों की सेहत से लेकर हड्डियों और मानसिक सेहत तक कई चीजें ऐसी हैं, जिन्हें लंबे समय तक नजरअंदाज करना परेशानी बढ़ा सकता है। नियमित स्वास्थ्य जांच भी इसी वजह से जरूरी मानी जाती है।
स्तनों में बदलाव को नजरअंदाज न करें
स्तनों में अचानक गांठ, आकार में बदलाव, त्वचा में खिंचाव या निप्पल से असामान्य स्राव जैसे बदलाव दिखें तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। उम्र और जोखिम के हिसाब से डॉक्टर मैमोग्राफी जैसी जांच की सलाह दे सकते हैं। सामान्य जोखिम वाली महिलाओं के लिए स्क्रीनिंग की शुरुआत की उम्र और अंतराल डॉक्टर के साथ तय करना बेहतर होता है।
सर्वाइकल जांच भी है जरूरी
पीरियड सामान्य होने का मतलब यह नहीं कि गर्भाशय ग्रीवा की सेहत भी पूरी तरह ठीक है। सर्वाइकल कैंसर की शुरुआती जांच से शरीर में होने वाले कुछ बदलाव समय रहते पकड़े जा सकते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी महिलाओं के लिए नियमित सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग पर जोर देता है। जांच की जरूरत और तरीका उम्र व स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार तय किया जाता है।
हड्डियों की ताकत पर दें ध्यान
हड्डियों की कमजोरी अक्सर शुरुआत में कोई साफ संकेत नहीं देती। उम्र बढ़ने के साथ इसका खतरा बढ़ सकता है, खासकर रजोनिवृत्ति के बाद। पर्याप्त कैल्शियम और विटामिन डी, नियमित शारीरिक गतिविधि और संतुलित खान-पान हड्डियों की सेहत के लिए जरूरी हैं। कुछ महिलाओं में जोखिम ज्यादा होने पर डॉक्टर हड्डियों की जांच भी सुझा सकते हैं।
मन और शरीर दोनों का रखें ख्याल
लगातार तनाव, बेचैनी, चिड़चिड़ापन, नींद खराब रहना या हर समय थकान महसूस होना भी सेहत से जुड़े संकेत हो सकते हैं। इन्हें सिर्फ रोजमर्रा की व्यस्तता मानकर टालना ठीक नहीं है। महिलाओं की अच्छी सेहत में मानसिक स्वास्थ्य भी उतना ही जरूरी है जितना शारीरिक स्वास्थ्य। इसके साथ वजन, ब्लड प्रेशर और दूसरी जरूरी जांच भी उम्र और व्यक्तिगत जोखिम के हिसाब से कराते रहना चाहिए।
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छोटी सावधानी बड़े फायदे देती है
महिलाओं को अपनी सेहत के लिए किसी एक लक्षण का इंतजार नहीं करना चाहिए। साल में कम से कम एक बार सामान्य स्वास्थ्य जांच और जरूरत के मुताबिक विशेषज्ञ से सलाह लेना फायदेमंद हो सकता है। अगर परिवार में किसी बीमारी का इतिहास है या कोई लगातार बना हुआ लक्षण है, तो जांच का समय और तरीका डॉक्टर से तय करें।