
Taliban minister: अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी की भारत यात्रा के दौरान हुए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला पत्रकारों को एंट्री नहीं देने का मामला तूल पकड़ गया है। यह कार्यक्रम नई दिल्ली स्थित अफगान दूतावास में हुआ, जहां केवल पुरुष पत्रकारों को ही अनुमति दी गई। घटना के बाद कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और अन्य विपक्षी दलों ने सरकार को घेरते हुए इसे “लोकतांत्रिक मूल्यों पर चोट” बताया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि भारत जैसी लोकतांत्रिक व्यवस्था में इस तरह का भेदभाव स्वीकार्य नहीं है और विदेश मंत्रालय को तुरंत इस मुद्दे पर तालिबान शासन से विरोध दर्ज कराना चाहिए।
विपक्ष का हमला, विदेश मंत्रालय से हस्तक्षेप की मांग
शिवसेना (यूबीटी) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए कहा कि तालिबान के रवैये से दुनिया परिचित है, लेकिन भारत को अपनी नीति स्पष्ट रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भले ही यह आयोजन दूतावास परिसर में हुआ हो, पर विदेश मंत्रालय को इस घटना का संज्ञान लेना चाहिए और तालिबान सरकार को औपचारिक पत्र लिखकर विरोध जताना चाहिए। प्रियंका ने कहा, “भारत को महिलाओं के सम्मान और समान भागीदारी की अपनी छवि बनाए रखनी होगी।”
कांग्रेस ने कहा — तालिबान मंत्री को बुलाना ही गलती थी
कांग्रेस प्रवक्ता शमा मोहम्मद ने सरकार की कूटनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत को ऐसे देश के प्रतिनिधि को आमंत्रित ही नहीं करना चाहिए, जहां महिलाओं के अधिकारों का दमन किया जाता है। उन्होंने कहा कि भारत में हर प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला पत्रकारों को बराबर अवसर मिलते हैं, ऐसे में सरकार को पहले ही स्पष्ट करना चाहिए था कि हमारे देश के नियमों के तहत भेदभाव नहीं चलेगा। विपक्ष ने इसे सरकार की “कमजोर विदेश नीति” करार दिया है और कहा कि भारत को तालिबान के आगे झुकने की छवि से बचना चाहिए।