संसद में महिला आरक्षण से जुड़े 131वें संशोधन विधेयक पर सरकार को बड़ा झटका लगा, जब एकजुट विपक्ष ने इसे पारित नहीं होने दिया। प्रधानमंत्री Narendra Modi की ‘अंतरात्मा की आवाज’ पर वोट देने की अपील भी असर नहीं दिखा सकी। दो-तिहाई बहुमत के अभाव में विधेयक गिर गया, जिसे सरकार के लिए पिछले कई वर्षों में पहली बड़ी विधायी हार माना जा रहा है।
विपक्ष की एकजुटता बनी सरकार की हार की वजह
वोटिंग के दौरान विपक्षी दल पूरी तरह एकजुट नजर आए और उन्होंने सरकार के प्रस्ताव को खारिज कर दिया। विधेयक के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े, जबकि इसे पास कराने के लिए करीब 352 वोटों की जरूरत थी। इस नतीजे ने साफ कर दिया कि संख्या बल के बिना बड़ा संवैधानिक बदलाव संभव नहीं है।
‘अंतरात्मा की आवाज’ की अपील भी बेअसर
वोटिंग से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सांसदों से अंतरात्मा की आवाज पर वोट देने की अपील की थी। वहीं गृह मंत्री Amit Shah ने भी बिल के समर्थन में माहौल बनाने की कोशिश की, लेकिन विपक्ष ने इसे राजनीतिक रणनीति बताते हुए खारिज कर दिया।
विवाद की जड़ में परिसीमन और प्रतिनिधित्व
विपक्ष का आरोप था कि महिला आरक्षण के साथ परिसीमन का मुद्दा जोड़कर दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। साथ ही यह भी कहा गया कि यह कदम राजनीतिक फायदे के लिए देश के चुनावी नक्शे को बदलने की योजना का हिस्सा हो सकता है।
विपक्षी नेताओं के तीखे बयान
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री M. K. Stalin ने इसे “दिल्ली के अहंकार की हार” बताया। वहीं Mamata Banerjee ने चेतावनी दी कि सीटों में भारी बढ़ोतरी देश के संतुलन को बिगाड़ सकती है। Jairam Ramesh ने भी सरकार के प्रस्ताव को “खतरनाक” करार दिया।
सरकार का पलटवार और आगे की रणनीति
संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju ने कहा कि विपक्ष ने महिलाओं को सशक्त करने का ऐतिहासिक मौका गंवा दिया। वहीं Devendra Fadnavis ने विपक्ष पर राजनीति करने का आरोप लगाया। सरकार ने संकेत दिए हैं कि वह भविष्य में इस मुद्दे को फिर से उठाएगी।