महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयकों पर संसद में जोरदार बहस शुरू हो गई है। चर्चा से पहले लोकसभा में मतविभाजन कराया गया, जिसमें 251 सांसदों ने बिल के पक्ष में और 185 ने विरोध में वोट दिया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि देशवासियों को भरोसा होना चाहिए कि पूरी चर्चा के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जनगणना में जाति के पहलू को भी शामिल किया जाएगा।
सरकार का पक्ष और बड़े बदलाव का दावा
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि महिला आरक्षण लागू करने का यह ऐतिहासिक अवसर है। उन्होंने बताया कि लोकसभा सीटों में करीब 50 प्रतिशत बढ़ोतरी होगी और कुल सीटें 815 तक पहुंच सकती हैं। इनमें से लगभग 272 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। सरकार का दावा है कि इस बदलाव से किसी राज्य को नुकसान नहीं होगा, बल्कि सभी का प्रतिनिधित्व और मजबूत होगा।
विपक्ष के सवाल और तीखा विरोध
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना गलत है। उन्होंने मांग की कि इसे अलग किया जाए, तभी विपक्ष समर्थन करेगा। वहीं समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह जल्दबाजी में फैसला लेना चाहती है। उन्होंने कहा कि भाजपा महिलाओं के मुद्दे को सिर्फ नारे के रूप में इस्तेमाल कर रही है और असली मंशा कुछ और है।
भाजपा का पलटवार और आंकड़ों के साथ जवाब
भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह बदलाव समय की मांग है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि परिसीमन के बाद कई राज्यों में सीटें बढ़ेंगी, जिससे प्रतिनिधित्व मजबूत होगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष गलत जानकारी फैलाकर जनता को भ्रमित कर रहा है और इस मुद्दे को बेवजह राजनीतिक रंग दे रहा है।
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प्रधानमंत्री का बड़ा संदेश और आगे की दिशा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण विधेयक को देश की विकास यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि यह फैसला देश की दिशा और दशा दोनों तय करेगा। उनके मुताबिक यह कदम बहुत पहले उठाया जाना चाहिए था। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि बहस के बाद यह विधेयक किस रूप में पास होता है और देश की राजनीति में क्या बदलाव लाता है।