संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े मुद्दों पर देश की राजनीति गरमा गई है। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि इस प्रक्रिया में किसी भी राज्य या वर्ग के साथ अन्याय नहीं होगा। उन्होंने इसे देश के भविष्य से जुड़ा ऐतिहासिक कदम बताते हुए भरोसा दिलाया कि यह निर्णय समानता और सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
“किसी के साथ भेदभाव नहीं” – पीएम की गारंटी
प्रधानमंत्री ने संसद में कहा कि संविधान हमें देश को टुकड़ों में सोचने की अनुमति नहीं देता। कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत एक है और इसी भावना के साथ महिला आरक्षण और परिसीमन की प्रक्रिया लागू की जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं होगा।
महिला आरक्षण को बताया ऐतिहासिक अवसर
उन्होंने कहा कि देश की आधी आबादी को नीति निर्धारण में शामिल करना समय की मांग है। उनके अनुसार, यह केवल एक कानून नहीं बल्कि महिलाओं के अधिकारों को मान्यता देने का प्रयास है, जिसे लंबे समय से टाला जाता रहा है।
राजनीति से ऊपर उठने की अपील
प्रधानमंत्री ने विपक्ष को सलाह दी कि इस मुद्दे को राजनीतिक रंग न दिया जाए। उन्होंने कहा कि जो लोग इसका विरोध करेंगे, उन्हें भविष्य में राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। यह मुद्दा राजनीति से ऊपर उठकर देशहित में देखा जाना चाहिए।
“क्रेडिट लेना है तो ले लो” – पीएम का बयान
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि उन्हें व्यक्तिगत श्रेय की कोई इच्छा नहीं है। अगर अन्य दल इस पहल का श्रेय लेना चाहते हैं, तो वे इसके लिए तैयार हैं। उनका फोकस केवल इस कानून को लागू कर देश को आगे बढ़ाने पर है।
बदलती राजनीति और महिला नेतृत्व
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ दशकों में महिलाएं ग्रासरूट स्तर पर मजबूत नेतृत्व बनकर उभरी हैं। अब समय आ गया है कि उन्हें निर्णय प्रक्रिया में बराबरी का स्थान दिया जाए। यह बदलाव देश की दिशा और दशा दोनों तय करेगा।