बांग्लादेश में गुरुवार को हुए 13वें संसदीय चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी को बड़ी जीत मिली है। गठबंधन ने 209 सीटों पर जीत दर्ज की है। बांग्लादेश के चुनाव में इस साल महिलाओं की राजनीति में भागीदारी एक अहम मुद्दा रहा। चुनाव आयोग की तरफ से साझा जानकारी के अनुसार बांग्लादेश के इस चुनाव में कुल महिला उम्मीदवारों की संख्या पुरुष कैंडिडेट्स की तुलना में ना के बराबर रही। ऊपर से जमात-ए-इस्लामी की ओर से राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को लेकर की गई टिप्पणी ने इस मामले को और हवा दे दी।
नेशनलिस्ट पार्टी बढ़त के साथ आगे
हालांकि, अनौपचारिक नतीजों के मुताबिक 13वें नेशनल इलेक्शन में सात महिला उम्मीदवार संसद के लिए चुनी गई हैं। अब तक के नतीजों के हिसाब से बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी बढ़त के साथ आगे है। बीएनपी बांग्लादेश में इस बार बहुमत के साथ सरकार बनाने वाली है; उसकी छह महिला उम्मीदवारों ने अपनी-अपनी सीटों पर जीत दर्ज की है।
चुनी गईं महिला उम्मीदवार
चुनी गई महिला उम्मीदवारों में मानिकगंज-3 से अफरोजा खान रीता, झालोकाटी-2 से इसरत सुल्ताना एलेन भुट्टो, सिलहट-2 से तहसीना रुशदिर लूना, फरीदपुर-2 से शमा ओबैद, फरीदपुर-3 से नायाब यूसुफ कमाल और नटोरे-1 से फरजाना शर्मिन पुतुल शामिल हैं। इसके अलावा, बैरिस्टर रूमिन फरहाना ब्राह्मणबरिया-2 से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनी गई हैं। उन्हें पहले बीएनपी से निकाल दिया गया था।
साइबर हमले हुए और धमकियां भी मिलीं
चुनावी अभियान और वोटिंग के दौरान महिला उम्मीदवारों ने बताया कि उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। महिला उम्मीदवारों का चरित्र हनन किया गया और, उनपर साइबर हमले हुए और धमकियां भी मिलीं। हालांकि, बीएनपी का रुख साफ था कि महिलाओं की भागीदारी और विकास के बिना देश का विकास संभव नहीं है।
महिलाओं की भागीदारी पर सवाल
बांग्लादेश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी पर सवाल उठाने का मतलब है कि देश के राजनीतिक इतिहास पर प्रश्न चिन्ह लगाना। बांग्लादेश के राजनीतिक इतिहास में दो महिलाओं का नाम इतना अहम है। वो दो नाम पूर्व पीएम और बीएनपी की पूर्व अध्यक्ष दिवंगत खालिदा जिया और बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना का है। इन दो महिलाओं ने बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था, विकास और राजनीति को आकार दिया है।