
वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2025 के छठे दिन मेंस जेवलिन थ्रो का फाइनल मुकाबला रोमांच से भरपूर रहा। त्रिनिदाद और टोबैगो के अनुभवी एथलीट केशोर्न वालकॉट ने शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। वहीं, भारत के ओलंपिक स्टार नीरज चोपड़ा उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके और चौथे स्थान पर रहे सचिन यादव मेडल से चूक गए।
13 साल बाद भी कायम वालकॉट का दबदबा
19 साल की उम्र में लंदन ओलंपिक 2012 का गोल्ड जीतकर इतिहास रचने वाले केशोर्न वालकॉट ने यह दिखा दिया कि आज भी उनका जलवा कायम है। उन्होंने अपने चौथे प्रयास में 88.16 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो कर सभी प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ दिया। उनके थ्रो का सिलसिला भी शानदार रहा-
पहला प्रयास: 81.22 मीटर
दूसरा प्रयास: 87.83 मीटर
तीसरा प्रयास: 81.65 मीटर
चौथा प्रयास: 88.16 मीटर
पांचवां प्रयास: 85.84 मीटर
छठा प्रयास: 83.00 मीटर
इस प्रदर्शन ने उन्हें गोल्ड दिला दिया।
जर्मनी और अमेरिका को मिला मेडल
वालकॉट के बाद जर्मनी के एंडरसन पीटर्स ने 87.38 मीटर के थ्रो के साथ सिल्वर मेडल अपने नाम किया। वहीं अमेरिका के कर्टिस थॉम्पसन को ब्रॉन्ज मेडल मिला।
नीरज चोपड़ा का फीका प्रदर्शन
भारत की सबसे बड़ी उम्मीद नीरज चोपड़ा का दिन अच्छा नहीं रहा। उन्होंने अपने पांच प्रयासों में केवल एक बार 84 मीटर से ऊपर थ्रो किया।
पहला प्रयास: 83.65 मीटर
दूसरा प्रयास: 84.03 मीटर
तीसरा प्रयास: फाऊल
चौथा प्रयास: 82.86 मीटर
पांचवां प्रयास: फाऊल
नीरज 84.03 मीटर से आगे नहीं बढ़ पाए और मेडल की दौड़ से बाहर हो गए।
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सचिन यादव ने किया प्रभावित, पर मेडल से दूर
भारत के सचिन यादव ने बेहतरीन शुरुआत की और चौथे स्थान पर फिनिश किया।
पहला प्रयास: 86.27 मीटर
दूसरा प्रयास: फाऊल
तीसरा प्रयास: 85.71 मीटर
चौथा प्रयास: 84.90 मीटर
पांचवां प्रयास: 85.96 मीटर
छठा प्रयास: 80.95 मीटर
हालांकि उन्होंने दमदार चुनौती पेश की, लेकिन मेडल से बस एक कदम दूर रह गए।
अरशद नदीम भी नहीं चमक सके
पाकिस्तान के अरशद नदीम भी खास प्रदर्शन नहीं कर पाए। उनका सर्वश्रेष्ठ थ्रो सिर्फ 82.75 मीटर रहा और वे शुरुआती राउंड से आगे नहीं बढ़ सके।
सचिन यादव ने चौथे स्थान पर रहकर उम्मीदें जिंदा रखीं
फाइनल में केशोर्न वालकॉट गोल्ड, एंडरसन पीटर्स सिल्वर और कर्टिस थॉम्पसन ब्रॉन्ज जीतकर पोडियम पर खड़े हुए। भारत के लिए नीरज चोपड़ा का फीका खेल निराशाजनक रहा, लेकिन सचिन यादव ने चौथे स्थान पर रहकर उम्मीदें जिंदा रखीं। यह साफ है कि अब भारतीय जेवलिन का भविष्य सिर्फ नीरज तक सीमित नहीं, बल्कि नई पीढ़ी भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर दम दिखा रही है।