
राजस्थान का विश्व मशहूर पुष्कर मेला इस समय अपनी पूरी चमक लिए हुए है। मेला मैदान में हर ओर पशुओं की रौनक, पशुपालकों की हलचल और पर्यटकों की काफी भीड़ है। ऊंट, घोड़े, गाय और भैंसे देखने के साथ खरीदने के लिए देश विदेश से लोगों का हुजूम पहुंच रहा है। पुष्कर में पशु मेले का आरंभ हो रहा है। अब तक यहां 5 हजार से अधिक पशु पहुंच चुके हैं। इनमें 3 हजार से अधिक घोड़े-घोड़ियां और करीब डेढ़ हजार ऊंट हैं। मेला ग्राउंड में खरीद-फरोख्त जारी है।
टेंट और पशुओं की मंडियां सज गई हैं
धार्मिक मेला 2 नवंबर से कार्तिक एकादशी स्नान के बाद शुरू होगा, लेकिन फिलहाल पशु मेला अपने शवाब पर है। नए मेला ग्राउंड में लग्ज़री टेंट और पशुओं की मंडियां लग गई हैं। विदेशी सैलानियों की संखया में तेजी से इजाफा हुआ है। ऊंटों की सवारी बड़ा आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
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17 सफेद घोड़ों के साथ मेले में पहुंचे हैं
केकड़ी के अश्वपालक राहुल जेतवाल अपने खास 17 सफेद घोड़ों के संग मेले में आए हैं। इनमें सबसे खास है 5 साल का बादल है। ये लगातार तीसरी बार पुष्कर मेला आया है। बादल अब तक करीब 300 बच्चों का पिता न चुका है और फिलहाल 150 घोड़ियां गर्भवती हैं। व्यापारी इसे खरीदने को लेकर के10 करोड़ रुपए तक की बोली लगा चुके हैं। इस पर राहुल का कहना है कि वह सिर्फ इसे प्रदर्शन के लिए लाया है।
रेतीले धोरों में कला का अनूठा संसार रचा
पुष्कर के सेंड आर्टिस्ट अजय रावत ने यहां पर रेतीले धोरों में कला प्रदर्शन किया है। उन्होंने करीब एक लाख टन बालू मिट्टी से वीर तेजाजी महाराज की विशाल कलाकृति को तैयार किया। । इसे बनाने में डेढ़ माह का समय लगा है। यह सेंड आर्ट दूर-दूर से आए सैलानियों के लिए आकर्षण का विषय है।