World Mental Health Day: आज के समय में वर्क प्रेशर और घरेलू समस्याओं के चलते मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ रहा है। इसके साथ ही डिजिटल क्रांति, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और विभिन्न गेम्स और एप्स के अत्यधिक इस्तेमाल से बच्चों और युवाओं में मानसिक तनाव बढ़ रहा है। लोग अक्सर इसे नजरअंदाज करते हैं, लेकिन समय के साथ-साथ ये परेशानी बढ़ती चली जाती है। मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ने से कई तरह की बीमारियां भी हमारे शरीर में घर कर लेती हैं। बता दें कि 10 अक्टूबर को दुनियाभर में World Mental Health Day मनाया जाता है। इस विशेष दिन को लेकर न्यूरो साइकियाट्रिक विशेषज्ञ डॉ. रवि राणा ने मानसिक स्वास्थ्य ठीक रखने के लिए आवश्यक चीजें बताई हैं जिनसे हम आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अपनी मेंटल हेल्थ को कैसे बेहतर बना सकते हैं।
शारीरिक स्वास्थ्य पर मानसिक तनाव का असर
डॉ. रवि राणा ने बताया कि एंग्जायटी, स्ट्रेस या डिप्रेशन जैसी मानसिक बीमारियां केवल मन को ही नहीं, बल्कि पूरे शरीर पर असर डालती हैं। लगातार तनाव में रहने से शरीर में कोर्टिसोल (Cortisol) हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। इससे हृदय रोग, सांस से जुड़ी समस्याएं, इम्युनिटी में कमी, हाइपरटेंशन, डायबिटीज और पेट की गंभीर बीमारियां पनपने लगती हैं।
आने वाली पीढ़ी के लिए क्यों जरूरी है सही मेंटल हेल्थ
हमारा वर्क कल्चर कई बार काफी टॉक्सिक हो जाता है, लेकिन हम फिर भी लगातार अपने काम में लगे रहते हैं क्योंकि हम ये नहीं समझ पाते कि इसका सही उपचार क्या है। टॉक्सिक वर्क कल्चर के चलते हमारा मानसिक स्वास्थ्य लगातार बिगड़ा जाता है। लेकिन नई जेनेरेशन के लिए ये परेशानी युवा अवस्था में ही शुरू हो सकती है। स्कूल से लेकर जॉब के समय तक आज के समय में हर कोई इतना बिजी हो जाता है कि मेंटल हेल्थ के बारे में सोचने का भी टाइम नहीं मिल पाता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ भी कई बार मेंटल हेल्थ को लेकर चर्चा करते हैं और बताते हैं कि कैसे हम अपने मानसिक स्वास्थ्य को ठीक रख सकते हैं।
झिझक छोड़ें, इलाज है बेहद आसान
अक्सर लोग ये समझ नहीं पाते कि उनको मानसिक परेशानी है वो किसी न किसी बहाने से इन्हें इग्नोर कर देते हैं या कहें कि सामाजिक झिझक या मानसिक बीमारी के ठप्पे के डर से लोग अपनी समस्याएं किसी से साझा नहीं करते। वो न सिर्फ अपने घर में बल्कि अपने सबसे करीबी लोगों को भी अपनी परेशानी नहीं बताते और सही इलाज कराने से बचते हैं। इसके कारण वे अन्य गलत राह चुन लेते हैं, जिससे बीमारी और बढ़ जाती है। जबकि हकीकत यह है कि हल्की काउंसलिंग, थेरेपी और न्यूनतम दवाओं के जरिए शुरुआती मानसिक समस्याओं का पूरी तरह से इलाज संभव है।
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क्या है इस साल के वर्ल्ड हेल्थ डे की थीम
डॉ. राणा ने बताया कि हर साल वर्ल्ड हेल्थ डे किसी न किसी थीम पर आधारित होता है। इस साल की थीम का मुख्य उद्देश्य है मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर चुके या कर रहे लोगों के व्यक्तिगत अनुभवों को सुनना और उन्हें नीतियों, देखभाल और समाज में सम्मानजनक स्थान देना। इस साल की थीम इस बात पर जोर देती है कि हम अपनी मानसिक परेशानी को दूर तभी कर सकते हैं जब हम उन लोगों के व्यक्तिगत अनुभवों को बारे में जानेंगे तो पहले इन परेशानियों को झेल चुके हैं या झेल रहे हैं।