आज दुनियाभर में विश्व कछुआ दिवस (World Turtle Day) मनाया जा रहा है और भारत में भी इसका धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय महत्व तेजी से बढ़ा है। कई लोगों की मान्यता है कि कछुआ न सिर्फ सौभाग्य और समृद्धि लाता है, बल्कि मां लक्ष्मी को आमंत्रित भी करता है। यही कारण है कि अब कछुए लोगों की रुचि का केंद्र बनते जा रहे हैं। पर्यावरण के लिए जरूरी इस प्राणी को राजधानी भोपाल के वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में विशेष संरक्षण मिला हुआ है। यह प्रदेश का पहला और एकमात्र कछुआ प्रजनन केंद्र (Turtle Breeding Centre) भी है, जहां 10 से ज्यादा प्रजातियों के 70 से अधिक कछुए संरक्षित हैं। यहां देशी और विदेशी प्रजातियों के दुर्लभ कछुए देखे जा सकते हैं, जिनमें से कुछ का वजन 50 किलो तक है।
वन विहार में है कछुओं का सुरक्षित घर
भोपाल के वन विहार में स्थित कछुआ केंद्र में 10 से ज्यादा प्रजातियों के करीब 70 कछुए संरक्षित हैं। यहां मौजूद पहाड़ी कछुए जमीन पर रहते हैं और पूरी तरह शाकाहारी होते हैं। इन्हें ताजी सब्जियां दी जाती हैं। कछुओं की देखरेख विशेषज्ञों द्वारा की जाती है।
ब्रीडिंग सेंटर के रूप में हो रहा विकास
वन विभाग ने वन विहार को एक टर्टल ब्रीडिंग सेंटर के रूप में विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यहां के कुछ कछुओं को प्राकृतिक आवास में छोड़ने के निर्देश दिए ताकि इनकी आबादी बढ़ाई जा सके।
विदेशी प्रजातियों की भी मौजूदगी
यहां दक्षिण अफ्रीका से लाई गई सलकटा प्रजाति के छह कछुए भी हैं जिन्हें तस्करी से बचाकर लाया गया था। इसके अलावा पातक प्रजाति का 50 किलो वजनी कछुआ भी यहां देखा जा सकता है, जिसे शाहजहांनाबाद से रेस्क्यू किया गया था।
धार्मिक मान्यता और बढ़ती लोकप्रियता
हिंदू मान्यताओं में कछुए को मां लक्ष्मी का वाहन और विष्णु के कूर्म अवतार से जोड़ा गया है। यही वजह है कि लोग इसे घर में रखने से धन और शांति आने की बात कहते हैं। कछुए की बढ़ती लोकप्रियता के पीछे उसकी आध्यात्मिक छवि भी है।