नोएडा/नई दिल्ली। वरिष्ठ साहित्यकार बल्लभ डोभाल का अंतिम संस्कार रविवार को दिल्ली के निगमबोध घाट पर हुआ। उनकी अंतिम यात्रा नोएडा स्थित उनके निवास स्थान से शुरू हुई। साहित्य, संस्कृति, कला और पत्रकारिता से जुड़े लोगों ने उन्हें भावभीनी विदाई दी।
पुत्र प्रकाश डोभाल और कैलाश डोभाल ने चिता को मुखाग्नि दी। बड़ी संख्या में साहित्यकार, पत्रकार और शुभचिंतक मौजूद रहे। सभी ने हिंदी साहित्य में उनके योगदान को याद किया।वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार प्रो. प्रदीप कुमार वेदवाल ने कहा कि यह हिंदी साहित्य की बड़ी क्षति है। डोभाल ने समाज, संस्कृति और मानवीय संवेदनाओं को अपनी लेखनी से आवाज दी।अंतिम संस्कार में पंकज बिष्ट, महेश दर्पण, राजा खुगशाल, भगवती प्रसाद डोभाल, डॉ. रोशन गौड़, कैलाश धूलिया, रमेश ध्यानी और राजेश डंडरियाल समेत कई साहित्यकार व पत्रकार उपस्थित रहे। उन्होंने उनके लेखन को अमूल्य योगदान बताया।
पुत्री प्रभा थपलियाल ने बताया कि देश-विदेश से शोक संदेश और फोन आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिता ने पाठकों के बीच जो स्थान बनाया, वह याद रखा जाएगा। उन्होंने उपन्यास ‘तिब्बत की बेटी’ सहित अन्य रचनाओं और प्रकाशन के दिनों की स्मृतियां साझा कीं।साहित्यकार की रचनाएं आने वाली पीढ़ियों के लिए उनकी विरासत बनी रहेंगी।