BRICS Summit Protocol : 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सात साल बाद भारत पहुंचे हैं। उनके दिल्ली आगमन के साथ ही एक सवाल तेजी से चर्चा में आ गया कि आखिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें रिसीव करने एयरपोर्ट क्यों नहीं गए। कई लोगों को यह जानने की उत्सुकता है कि क्या इसके पीछे कोई कूटनीतिक वजह है या फिर यह सामान्य प्रोटोकॉल का हिस्सा है। दरअसल, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में नेताओं के स्वागत के लिए तय नियम होते हैं।
एयरपोर्ट पर किसने किया स्वागत?
शी जिनपिंग के दिल्ली पहुंचने पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने उनका स्वागत किया। यह व्यवस्था पहले से तय प्रोटोकॉल के तहत की गई थी। बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में विदेशी नेताओं के स्वागत की जिम्मेदारी अक्सर किसी केंद्रीय मंत्री या राज्य मंत्री को सौंपी जाती है। इसका उद्देश्य सभी देशों के प्रतिनिधियों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करना होता है।
बहुपक्षीय और द्विपक्षीय दौरे में बड़ा अंतर
कूटनीतिक नियमों के अनुसार बहुपक्षीय और द्विपक्षीय यात्राओं के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं होती हैं। यदि कोई विदेशी नेता विशेष द्विपक्षीय या राजकीय दौरे पर भारत आता है तो प्रधानमंत्री स्वयं एयरपोर्ट पर स्वागत कर सकते हैं। लेकिन ब्रिक्स जैसे बहुपक्षीय सम्मेलन में कई देशों के शीर्ष नेता एक साथ पहुंचते हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री का हर नेता को व्यक्तिगत रूप से रिसीव करना व्यावहारिक नहीं माना जाता।
क्यों जरूरी है समानता का सिद्धांत?
ब्रिक्स मंच पर भारत केवल चीन ही नहीं बल्कि रूस, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका और अन्य सदस्य देशों के नेताओं की भी मेजबानी कर रहा है। ऐसे में यदि किसी एक नेता का विशेष स्वागत किया जाए तो अन्य देशों के लिए भी वही व्यवस्था करनी पड़ेगी। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में सभी सदस्य देशों के साथ समान व्यवहार को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी वजह से स्वागत की जिम्मेदारी मंत्रियों को सौंपी जाती है।
विदेश मंत्रालय पहले से करता है तैयारी
ऐसे बड़े आयोजनों के लिए विदेश मंत्रालय महीनों पहले तैयारियां शुरू कर देता है। प्रत्येक विदेशी प्रतिनिधिमंडल के लिए अलग प्रोटोकॉल अधिकारी और स्वागत प्रतिनिधि नियुक्त किए जाते हैं। एयरपोर्ट से लेकर होटल और कार्यक्रम स्थल तक की व्यवस्था पहले से तय होती है। इससे सभी नेताओं को सम्मानजनक और समान स्तर की मेजबानी मिलती है।
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पुतिन और अन्य नेताओं के साथ भी यही व्यवस्था
यह व्यवस्था केवल शी जिनपिंग के लिए नहीं अपनाई गई। ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने पहुंचे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत अन्य देशों के नेताओं के स्वागत के लिए भी मंत्री स्तर की व्यवस्था की गई है। इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एयरपोर्ट पर न पहुंचना किसी एक देश या नेता से जुड़ा मामला नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक प्रोटोकॉल और बहुपक्षीय सम्मेलन की स्थापित परंपरा का हिस्सा है।