
यम द्वितीया 2025: दीपावली के तुरंत बाद मनाई जाने वाली यम द्वितीया, जिसे भैया दूज के नाम से भी जाना जाता है, 2025 में एक विशेष आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखती है। खासकर उत्तर प्रदेश के अयोध्या में इस दिन ‘मृत्यु के देवता’ यमराज की विशेष पूजा की परंपरा है, जो धार्मिक मान्यताओं और पारिवारिक रिश्तों के पवित्र प्रतीक के रूप में स्थापित है। यम द्वितीया का दिन भाई-बहन के स्नेह और विश्वास का उत्सव है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन यमराज अपनी बहन यमुनाजी के आमंत्रण पर उनके घर गए थे।
दीर्घायु की कामना
यमुनाजी ने उन्हें प्रेमपूर्वक भोजन कराया और तिलक कर दीर्घायु की कामना की। इस पर प्रसन्न होकर यमराज ने वचन दिया कि जो बहन इस दिन अपने भाई को प्रेमपूर्वक तिलक करेगी, उसका भाई दीर्घायु और यमलोक से सुरक्षित रहेगा। अयोध्या में इस पर्व का अलग ही स्वरूप देखने को मिलता है। यहां यमराज की मूर्तियों की स्थापना कर विधिपूर्वक पूजा की जाती है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, यमराज की पूजा से मृत्यु का भय कम होता है और व्यक्ति को जीवन में धर्म और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है।
भगवान श्रीराम से जुड़ा है रहस्य
अयोध्या, जो भगवान श्रीराम की नगरी मानी जाती है, वहां यमराज की पूजा आत्मा की शुद्धि और मोक्ष प्राप्ति से भी जोड़ी जाती है। इस दिन बहनें व्रत रखती हैं, अपने भाइयों को आमंत्रित कर विशेष पकवान बनाती हैं और उन्हें तिलक कर उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं। भाई भी अपनी बहनों को उपहार देकर उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हैं। यम द्वितीया का यह पर्व केवल एक पारिवारिक रस्म नहीं, बल्कि मृत्यु के भय से मुक्ति, जीवन की नश्वरता की स्वीकृति और पारिवारिक प्रेम की पुनर्स्थापना का प्रतीक है।
पूरे भारत में मनाया जाता है पर्व
2025 में यम द्वितीया का पर्व अयोध्या सहित पूरे भारत में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा, और यह पुनः याद दिलाएगा कि मृत्यु कोई अंत नहीं, बल्कि एक नई यात्रा की शुरुआत है – और यमराज उस यात्रा के नियामक हैं।