
Noida News: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के चारों ओर विकसित हो रही यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यमुना प्राधिकरण) की यमुना सिटी में नई बिल्डिंग बायलॉज को अंतिम रूप देने के लिए प्राधिकरण ने मंथन तेज कर दिया है। यह नई नीति एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) की कलर कोडेड जोनिंग मैप (सीसीजेडएम) पर आधारित होगी, जो विमान संचालन के लिए सुरक्षित फ्लाइट पाथ सुनिश्चित करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। इस बदलाव से एयरपोर्ट के 20 किलोमीटर के दायरे में आने वाले क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियां प्रभावित होंगी, खासकर उन बिल्डर्स पर जो ग्रुप हाउसिंग प्लॉट्स खरीदकर हाई-राइज प्रोजेक्ट्स की योजना बना रहे थे।
बैठक में ये लोग रहे मौजूद
यह फैसला यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के बोर्ड स्तर पर लिया गया है। 7 सितंबर 2025 को सेक्टर ओमेगा-1 स्थित यमुना प्राधिकरण कार्यालय में आयोजित 86वीं बोर्ड बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई, जिसकी अध्यक्षता उद्योग विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं यमुना प्राधिकरण चेयरमैन आलोक कुमार ने की। बैठक में यमुना प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) राकेश कुमार सिंह, विशेष कार्याधिकारी एवं नोडल अधिकारी शैलेंद्र भाटिया सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
रिपोर्ट के आधार पर मैप्स को दी जाएगी मंजूरी
यमुना प्राधिकरण ने अपनी पुरानी बिल्डिंग बायलॉज-2010 में संशोधन की मंजूरी दी है, जो नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास के क्षेत्रों में एएआई के दिशा-निर्देशों को शामिल करेगी। एयरपोर्ट साइट से 20 किलोमीटर के दायरे में निर्माण पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव पारित किया गया है, ताकि विमान उड़ान और लैंडिंग के दौरान कोई बाधा न हो। प्राधिकरण एक विशेषज्ञ कंसल्टेंट को नियुक्त करने की योजना बना रहा है, जो फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर), अनुमत ऊंचाई और अन्य पैरामीटर्स का अध्ययन कर रिपोर्ट सौंपेगा। इस रिपोर्ट के आधार पर बिल्डिंग मैप्स को मंजूरी दी जाएगी।
24 मीटर तक की इमारतें बनाने की है अनुमति
यमुना प्राधिकरण क्षेत्रों में 24 मीटर तक की इमारतें बनाने की अनुमति है, लेकिन ऊंची इमारतों के लिए एएआई से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) जरूरी होता है। नई बायलॉज एएआई के कलर कोडेड जोनिंग मैप (सीसीजेडएम) पर आधारित होगी, जिसमें एयरपोर्ट की रनवे से दूरी के आधार पर क्षेत्रों को विभिन्न जोनों में वर्गीकृत किया गया है। यह मैप रंग-कोडेड है, जहां हर जोन में अधिकतम अनुमत ऊंचाई (एबीओवी ग्राउंड लेवल) तय है। एयरपोर्ट साइट से 20 किमी के दायरे में सभी निर्माण एएआई के दिशा-निर्देशों का पालन करेंगे। इसके अलावा, मौजूदा और नई सभी इमारतों के लिए स्ट्रक्चरल ऑडिट अनिवार्य कर दिया गया है, जिसे आईआईटी दिल्ली, आईआईटी रुड़की, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एविएशन, सीएसआईआर और सेंट्रल यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों की एक पैनल करेगी।
एएआई कलर कोडिंग जोन के नियम
एएआई के कलर कोडेड जोनिंग मैप (सीसीजेडएम) विमानन सुरक्षा मानकों पर आधारित है, जो इमारतों की ऊंचाई को एयरपोर्ट रनवे से दूरी के अनुसार नियंत्रित करता है। यह मैप रंगों (जैसे रेड, येलो, ग्रीन आदि) से चिह्नित जोनों को दर्शाता है, जहां प्रत्येक जोन में अधिकतम अनुमत ऊंचाई तय है। जोन को एयरपोर्ट की ऊंचाई (समुद्र तल से 200 मीटर) को ध्यान में रखते हुए बनाए गए हैं। बिल्डिंग बायलॉज बनाते समय इन जोनों को आधार बनाना अनिवार्य होगा, जिसमें ग्राउंड कवरेज, सेटबैक, पार्किंग और ओपन स्पेस जैसे अन्य नियम भी शामिल हैं। एएआई के नियमों के अनुसार, ऊंची इमारतों (15 मीटर से अधिक) के लिए एनओसी अनिवार्य है, और बिना मंजूरी के निर्माण पर सख्त कार्रवाई होगी। इसके अलावा, वृक्षों या अन्य संरचनाओं की ऊंचाई भी नियंत्रित होगी।
प्राधिकरण बिल्डिंग मैप का मूल्यांकन कर मंजूरी देगा
यमुना प्राधिकरण के विशेष कार्याधिकारी एवं नोडल अधिकारी शैलेंद्र भाटिया ने कहा, "प्लॉट आवंटी को आवेदन जमा करना होगा, और प्राधिकरण बिल्डिंग मैप का मूल्यांकन कर मंजूरी देगा। एक बार मंजूरी मिलने पर वे आवासीय या अन्य उद्देश्यों के लिए निर्माण कर सकते हैं। हालांकि, यदि कोई डेवलपर 15 मीटर से ऊंची इमारत बनाना चाहता है, तो एएआई से नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य होगा, उसके बाद ही हम मंजूरी देंगे।" भाटिया ने आगे जोर देकर कहा कि यह बदलाव एयरपोर्ट संचालन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है, और यमुना प्राधिकरण सभी हितधारकों के साथ समन्वय बनाए रखेगा।
प्रभाव और बिल्डर्स की चिंताएं
इस नई नीति से यमुना सिटी के लगभग 30,000 आवासीय प्लॉट आवंटियों, वाणिज्यिक और औद्योगिक हितधारकों पर असर पड़ेगा। कई बिल्डर्स, जिन्होंने ग्रुप हाउसिंग स्कीमों में प्लॉट खरीदे थे, हाई-राइज इमारतें बनाकर मोटा मुनाफा कमाने की योजना बना रहे थे, लेकिन अब उन्हें ऊंचाई सीमाओं के कारण अपने प्लान्स में कटौती करनी पड़ेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि लो-राइज घर मालिकों पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा, लेकिन हाई-राइज डेवलपर्स को एएआई एनओसी के लिए अतिरिक्त समय और लागत का सामना करना पड़ेगा।
दिसंबर 2025 से होने वाली है शुरुआत
क्रेडाई-एनसीआर के अधिकारियों ने इसे विमानन सुरक्षा के लिए सकारात्मक कदम बताया है, लेकिन बुनियादी सुविधाओं (जैसे सड़कें, बिजली, पानी) के अभाव में निवेशकों की चिंताओं को भी स्वीकार किया। यमुना प्राधिकरण ने जनता से सुझाव मांगने के लिए समयसीमा निर्धारित की है, और यदि अधिक विरोध होता है तो नीति पर पुनर्विचार संभव है। यह बदलाव न केवल जेवर एयरपोर्ट के आसपास के विकास को नियोजित बनाएगा, बल्कि पूरे क्षेत्र में सतत शहरीकरण को बढ़ावा देगा। यह नीति उत्तर प्रदेश सरकार के 'उत्तर प्रदेश भवन निर्माण एवं विकास उपनियम, 2025' से भी जुड़ी हुई है, जो नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण में एक समान निर्माण नियम लागू करेगी। एयरपोर्ट के संचालन की शुरुआत दिसम्बर, 2025 से होने वाली है, इसलिए ये नियम तत्काल प्रभावी हो सकते हैं।