मध्य प्रदेश के ग्वालियर के रहने वाले 17 वर्षीय यशवर्धन सिंह चौहान इन दिनों चर्चा में हैं। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने उन्हें श्रीलंका दौरे के लिए भारतीय अंडर-19 टीम का कप्तान बनाया है। लेकिन यहां तक पहुंचने का उनका सफर आसान नहीं रहा। साल 2020 में कोरोना महामारी के दौरान उनके परिवार का कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ था। घर में आर्थिक परेशानी थी, लेकिन उसी समय यशवर्धन ने एक महंगे क्रिकेट बल्ले की मांग की। हालात कठिन थे, फिर भी उनके पिता अनामी सिंह चौहान ने बेटे के सपने पर भरोसा किया और कर्ज लेकर करीब 65 हजार रुपये का बल्ला खरीद दिया।
एक बल्ले ने बदल दी पूरी कहानी
पिता का यह फैसला आगे चलकर यशवर्धन के करियर का बड़ा मोड़ साबित हुआ। उसी बल्ले के साथ उन्होंने जूनियर क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन करना शुरू किया। साल 2021 में अंडर-13 कानमडीकर ट्रॉफी में यशवर्धन ने लगभग 1300 रन बनाकर सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। उनकी लगातार रन बनाने की क्षमता और लंबी पारियां खेलने का अंदाज चयनकर्ताओं की नजर में आ गया। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार अलग-अलग स्तर पर अच्छा प्रदर्शन करते रहे।
शांत स्वभाव और समझदारी बनी ताकत
यशवर्धन सिर्फ बल्लेबाजी के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी कप्तानी और खेल को समझने की क्षमता के लिए भी जाने जाते हैं। जूनियर क्रिकेट में कई बार उन्होंने दबाव के समय टीम को संभाला। कोच और चयनकर्ता लंबे समय से उनकी नेतृत्व क्षमता की तारीफ करते रहे हैं। यही वजह रही कि श्रीलंका दौरे के लिए उन्हें टीम की कमान सौंपी गई। उनके साथ लक्ष्य रायचंदानी को उपकप्तान बनाया गया है। ग्वालियर और पूरे चंबल क्षेत्र में इस खबर के बाद खुशी का माहौल है।
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अब भारत की कप्तानी संभालेंगे यशवर्धन
भारतीय अंडर-19 टीम 23 जून से विशेष प्रशिक्षण शिविर में हिस्सा लेगी। इसके बाद टीम 30 जून को श्रीलंका रवाना होगी। दौरे पर भारत को तीन वनडे और दो बहु-दिवसीय मुकाबले खेलने हैं। पहला मैच 4 जुलाई को हंबनटोटा में खेला जाएगा। अब सभी की नजर यशवर्धन सिंह चौहान पर होगी, जो एक समय पिता के भरोसे और 65 हजार रुपये के बल्ले के सहारे अपने सपनों का पीछा कर रहे थे। आज वही खिलाड़ी भारत की अंडर-19 टीम का कप्तान बनकर नई कहानी लिखने की तैयारी में है।