
बिहार की सियासत में इस वक्त सबसे बड़ी गूंज अगर किसी की है, तो वो बाबा बुलडोजर यानी योगी आदित्यनाथ की है. दरभंगा की सभा में सीएम योगी ने ऐसा हमला बोला कि पटना से दिल्ली तक हलचल मच गई. मंच से योगी ने INDI गठबंधन को तीन बंदरों की जोड़ी पप्पू, टप्पू और अप्पू बताते हुए विपक्ष की बोलती बंद कर दी. उन्होंने कहा कि ये तीनों बिहार की सुरक्षा में सेंध लगाने और जनता को जात-पात में उलझाने का काम कर रहे हैं. गांधीजी के तीन बंदरों का उदाहरण देते हुए योगी बोले जहां गांधी के बंदर कहते थे बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो, बुरा मत बोलो, वहीं ये तीन बंदर हैं जो सच देख नहीं सकते, सुन नहीं सकते और बोल नहीं सकते.
विपक्ष पर 440 वोल्ट का प्रहार
योगी आदित्यनाथ ने दरभंगा की रैली में जो कहा, उसने पूरे बिहार का माहौल बदल दिया. उन्होंने राहुल गांधी, अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव को निशाने पर लेते हुए कहा कि पप्पू देश की निंदा करता है, टप्पू बिहार के युवाओं को बहकाता है और अप्पू जातिवाद की आग भड़काता है. उनके भाषण के दौरान मैदान जय श्रीराम और बाबा बुलडोजर जिंदाबाद के नारों से गूंज उठा. महिलाओं ने तालियां बजाईं, युवाओं ने जोश में झंडे लहराए और माहौल चुनावी से ज्यादा भावनात्मक होता गया.
चुनावी लड़ाई, पप्पू-टप्पू, अप्पू-गप्पू पर आई !
योगी के इस बयान ने विपक्ष को असहज कर दिया. सिवान में अखिलेश यादव ने पलटवार करते हुए कहा पूरी बीजेपी गप्पू है और बाकी सब चप्पू हैं. हालांकि, इस जवाब को लोग मजाक में लेने लगे और अब सोशल मीडिया पर गप्पू बनाम बुलडोजर बाबा की जंग छिड़ गई है. जानकारों का कहना है कि योगी का यह भाषण महज़ प्रचार नहीं बल्कि राजनीतिक रणनीति का मास्टरस्ट्रोक है. एक ओर पीएम मोदी जहां विकास और सुरक्षा की बात कर रहे हैं, वहीं योगी जनता की भावनाओं से सीधा जुड़ने का काम कर रहे हैं.
बिहार की लड़ाई अब पप्पू, टप्पू, अप्पू और गप्पू पर!
योगी की दहाड़ के बाद बिहार का चुनावी रंग बदल चुका है. एनडीए के खेमे में नया जोश है, तो विपक्षी खेमे में बेचैनी की खबर है, योगी की तीन बंदरों वाली लाइन अब जनता के बीच नारा बन गई है. राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि योगी के भाषण ने एनडीए को एक नई दिशा दी है. वहीं, अखिलेश के गप्पू वाले बयान ने भी इस लड़ाई को और मजेदार बना दिया है.