उत्तर प्रदेश की राजनीति अब पूरी तरह मिशन-2027 की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। 2024 लोकसभा चुनाव में बीजेपी को राज्य में बड़ा झटका लगा था। 2019 में 62 सीटें जीतने वाली पार्टी 2024 में 33 सीटों तक सिमट गई, जबकि समाजवादी पार्टी 37 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। इसके बाद बीजेपी ने संगठन और चुनावी रणनीति दोनों में बदलाव शुरू कर दिया। दिल्ली से लेकर लखनऊ तक लगातार बैठकों का दौर जारी है और पार्टी नेतृत्व बूथ स्तर तक संगठन को फिर से मजबूत करने में जुटा है।
योगी फैक्टर बना बीजेपी की सबसे बड़ी ताकत
बीजेपी की सबसे बड़ी ताकत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को माना जा रहा है। कानून व्यवस्था, माफिया पर कार्रवाई, राम मंदिर, काशी, निवेश, एक्सप्रेस-वे और बड़े विकास कार्यों के कारण योगी की अलग राजनीतिक पहचान बनी है। पार्टी को भरोसा है कि 2027 के चुनाव में भी योगी सबसे बड़ा चेहरा रहेंगे। इसके साथ ही बीजेपी का मजबूत बूथ संगठन, लाभार्थी योजनाओं से जुड़े करोड़ों परिवार और गैर-यादव पिछड़ों व गैर-जाटव दलितों में बनी पकड़ भी पार्टी की बड़ी ताकत मानी जा रही है।
योजनाओं और सामाजिक समीकरण पर भरोसा
बीजेपी का मानना है कि मुफ्त राशन, उज्ज्वला योजना, किसान सम्मान निधि, आयुष्मान भारत और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी योजनाओं का लाभ पाने वाले करोड़ों परिवार चुनाव में पार्टी के साथ खड़े रह सकते हैं। वहीं पिछले एक दशक में पार्टी ने सवर्ण वोट बैंक के साथ गैर-यादव पिछड़ों और गैर-जाटव दलित समाज में भी मजबूत आधार तैयार किया है। 2017 और 2022 की जीत में यही सामाजिक समीकरण बीजेपी के लिए निर्णायक साबित हुआ था।
PDA फॉर्मूला समेत चार बड़ी चुनौतियां
दूसरी ओर बीजेपी के सामने कई बड़ी चुनौतियां भी हैं। समाजवादी पार्टी का PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक फॉर्मूला 2024 लोकसभा चुनाव में असरदार साबित हुआ। इसके अलावा लगभग 10 साल की सत्ता के बाद सरकार के खिलाफ संभावित नाराजगी, बेरोजगारी, भर्ती परीक्षाओं, पेपर लीक और स्थानीय मुद्दे भी चुनावी माहौल को प्रभावित कर सकते हैं। राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर विपक्ष लगातार सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है, जबकि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से उठाने में जुटी हैं। वहीं 2024 के नतीजों के बाद विपक्ष का बढ़ा आत्मविश्वास भी बीजेपी के लिए चुनौती माना जा रहा है।
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2027 में होगी रणनीति और समीकरणों की असली परीक्षा
फिलहाल उत्तर प्रदेश की राजनीति में सभी दल 2027 की तैयारी में जुट चुके हैं। बीजेपी जहां योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व, संगठन और सरकारी योजनाओं के दम पर वापसी का भरोसा जता रही है, वहीं विपक्ष सामाजिक समीकरण और PDA रणनीति के सहारे मुकाबले को और कड़ा बनाने की कोशिश कर रहा है। आने वाले समय में संगठन, मुद्दे और राजनीतिक गठजोड़ यह तय करेंगे कि उत्तर प्रदेश की अगली सियासी दिशा किस ओर जाती है।