Uttar Pradesh Development Model : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को लखनऊ स्थित लोक भवन में मिशन कर्मयोगी के तहत दो दिवसीय ‘साधना श्रृंखला 2026’ कार्यशाला का शुभारंभ किया। इस कार्यक्रम का मकसद सरकारी अधिकारियों को नई तकनीक और भारतीय ज्ञान परंपरा के साथ बेहतर काम करने के लिए तैयार करना है। कार्यशाला का आयोजन उत्तर प्रदेश की डॉ. राम मनोहर लोहिया प्रशासन एवं प्रबंध अकादमी और केंद्र सरकार के सहयोग से किया जा रहा है। इसमें आठ राज्यों और चार केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासन की असली सफलता सरकारी योजनाओं के कागजों पर पूरा होने से नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आने से तय होती है।
फाइलों से आगे बढ़कर जनता की सेवा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि लोक सेवक का काम केवल फाइलों का निपटारा करना नहीं है। असली सफलता तब है, जब किसी बुजुर्ग, महिला, युवा, किसान या जरूरतमंद व्यक्ति की समस्या का समय पर समाधान हो। इससे लोगों को सरकारी व्यवस्था पर भरोसा होता है। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल तकनीक तेजी से शासन के कामकाज को बदल रही हैं। ऐसे में सरकारी कर्मचारियों को भी इन बदलावों के अनुरूप तैयार करना जरूरी है। अधिकारियों को तकनीक के साथ संवेदनशीलता और जिम्मेदारी को भी अपने काम का हिस्सा बनाना होगा।
2017 से पहले की व्यवस्था पर साधा निशाना
सीएम योगी ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले परिवारवाद, तुष्टीकरण और भ्रष्टाचार जैसी समस्याओं ने प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावित किया था। उनके मुताबिक, अपराध, माफियाराज और नीतिगत उदासीनता के कारण उत्तर प्रदेश की विकास क्षमता को नुकसान पहुंचा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में डबल इंजन सरकार प्रशासनिक कार्यसंस्कृति को बेहतर बनाने के लिए काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि पिछले साढ़े नौ वर्षों में प्रदेश ने अपनी पुरानी बीमारू छवि से बाहर निकलकर विकास की नई दिशा पकड़ी है। उन्होंने इस बदलाव को बॉटलनेक से ब्रेकथ्रू स्टेट बनने की यात्रा बताया।
आवास और स्वास्थ्य सेवाओं का किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने प्रदेश में हुए विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि इंसेफेलाइटिस पर प्रभावी नियंत्रण हासिल किया गया है। उन्होंने दावा किया कि जिस बीमारी से चार दशकों में करीब 50 हजार बच्चों की मौत हुई, उससे होने वाली मौतों की संख्या अब शून्य हो गई है। इसके अलावा उन्होंने बताया कि पिछले साढ़े नौ वर्षों में 65 लाख गरीब परिवारों को आवास उपलब्ध कराए गए हैं। तीन करोड़ से अधिक परिवारों के घरों में शौचालय बनाए गए हैं। वहीं, 15 करोड़ से अधिक लोग प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना का लाभ पा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इन योजनाओं को प्रदेश में हुए बदलाव का हिस्सा बताया।
एक्सप्रेसवे और हवाई संपर्क में बढ़ोतरी
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र में पहले पानी पहुंचाने के लिए ट्रेन और टैंकरों का सहारा लेना पड़ता था, लेकिन अब वहां हर घर जल योजना के जरिए पानी पहुंचाने का काम आगे बढ़ा है। उन्होंने प्रदेश में सड़क, रेल और हवाई संपर्क के विस्तार का भी जिक्र किया। मुख्यमंत्री के मुताबिक, वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश के पास करीब डेढ़ एक्सप्रेसवे थे, जबकि अब राज्य में एक्सप्रेसवे का नेटवर्क काफी बढ़ गया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में पांच अंतरराष्ट्रीय और 17 घरेलू हवाई अड्डे संचालित हो रहे हैं। सरकार का कहना है कि बेहतर संपर्क व्यवस्था से विकास और आर्थिक गतिविधियों को गति मिली है।
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19.26 लाख सरकारी कर्मचारी पोर्टल से जुड़े
मुख्यमंत्री ने सरकारी कर्मचारियों के प्रशिक्षण को भी अहम बताया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के 19 लाख 26 हजार सरकारी कर्मचारी iGOT कर्मयोगी पोर्टल पर पंजीकृत हैं और अब तक करीब चार करोड़ प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरे किए जा चुके हैं। प्रदेश के 334 से अधिक प्रशिक्षण संस्थान उन्नति पोर्टल से जुड़े हैं। योगी ने कहा कि प्रशिक्षण की सफलता केवल प्रमाण पत्रों की संख्या से नहीं मापी जानी चाहिए। इसका असर अधिकारियों के फैसलों, सरकारी प्रक्रियाओं की सरलता और आम लोगों को मिलने वाली सेवाओं में दिखाई देना चाहिए। साधना श्रृंखला 2026 के जरिए प्रशासनिक क्षमता बढ़ाने और दूसरे राज्यों के अच्छे अनुभवों से सीखने पर जोर दिया जा रहा है।