उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हरियाणा के कैथल जिले के सोंगल गांव स्थित सिद्ध बाबा मुकुटनाथ जी की प्राचीन तपस्थली पहुंचे। इस दौरान बड़ी संख्या में संत, महंत और श्रद्धालु मौजूद रहे। योगी आदित्यनाथ ने इस पवित्र स्थल पर पहुंचकर संत परंपरा को नमन किया और सभी श्रद्धालुओं का अभिवादन किया। उन्होंने कहा कि इस भूमि से जुड़ी आध्यात्मिक परंपरा बहुत पुरानी और प्रभावशाली रही है।
संत परंपरा को किया नमन
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नाथ संप्रदाय के संतों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने महंत गणेश जी महाराज की स्मृतियों को याद करते हुए कहा कि उन्हें इस पवित्र परंपरा के प्रति सम्मान व्यक्त करने का अवसर मिला है। योगी ने कहा कि इस भूमि पर संतों और भक्तों का इतना बड़ा जमावड़ा होना अपने आप में एक विशेष अवसर है और उन्हें यहां आकर बहुत खुशी महसूस हो रही है।
धर्मसभा में बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालु
इस मौके पर आयोजित भंडारे और धर्मसभा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह स्थान केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं बल्कि संत परंपरा की शक्ति का भी प्रतीक है। उन्होंने कहा कि सोंगल की भूमि ने हर युग में अपना प्रभाव दिखाया है और यहां की परंपरा देश की आध्यात्मिक विरासत को आगे बढ़ाती रही है।
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सनातन विरोधियों पर भी साधा निशाना
अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने सनातन का विरोध करने वालों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जब भी ऐसी सरकारें सत्ता में आती हैं जो सनातन परंपरा के खिलाफ सोच रखती हैं, तब तुष्टीकरण की राजनीति बढ़ती है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद देश में कश्मीर और नक्सलवाद जैसी समस्याएं भी उसी सोच का परिणाम हैं, जिन्होंने राष्ट्रहित के बजाय राजनीति को प्राथमिकता दी।
इतिहास से जुड़ा है सोंगल का मठ
कैथल के सोंगल गांव में स्थित बाबा मुकुटनाथ मठ एक ऐतिहासिक धार्मिक स्थल माना जाता है। संतों के अनुसार सिद्ध बाबा मुकुटनाथ महंत ने ही इस गद्दी की शुरुआत की थी। बाद में धर्मनाथ पंथ की कई गद्दियां इसी स्थान से निकलीं। इस मठ में बाबा मुकुटनाथ और बाबा गोरखनाथ की पूजा होती है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
सदियों पुरानी परंपरा का केंद्र
बताया जाता है कि इस मठ का इतिहास लगभग 1600 से 1700 साल पुराना माना जाता है। परिसर में 17 महंतों की समाधियां भी बनी हुई हैं। मान्यता है कि यहां श्रद्धा से माथा टेकने पर मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इतिहास में यह भी बताया जाता है कि एक समय मुगल काल में इस मठ पर कब्जा कर लिया गया था, लेकिन बाद में नाथ पंथ के संतों ने इसे मुक्त कराया और परंपरा को फिर से आगे बढ़ाया।