यूपी विधानसभा के बजट सत्र में उस समय माहौल बदल गया, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा का जवाब देते हुए विपक्ष पर तीखा हमला बोला। शुरुआत विकास और योजनाओं से हुई, लेकिन भाषण के बीच में ही बात इतिहास और राष्ट्रवाद तक पहुंच गई। इसके बाद सदन में पहले सन्नाटा और फिर जोरदार हंगामा देखने को मिला।
‘बाबर’ और ‘वंदे मातरम’ पर सीधा वार
मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ लोग बाबर की कब्र पर सजदा करने की बात करते हैं और वंदे मातरम गाने से परहेज करते हैं। उन्होंने साफ कहा कि जो वंदे मातरम का सम्मान नहीं करता, उसे अपनी पार्टी में जगह नहीं मिलनी चाहिए। उनके इस बयान को भाजपा ने राष्ट्रवाद की साफ लाइन बताया, जबकि विपक्ष ने इसे राजनीतिक बयान करार दिया। बयान आते ही सपा और कांग्रेस के सदस्य विरोध में खड़े हो गए।
विकास के आंकड़ों का भी जिक्र
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में प्रदेश के विकास का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश अब पिछड़े राज्यों की सूची से निकलकर निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर में आगे बढ़ रहा है। अयोध्या, प्रयागराज और वाराणसी में बढ़ती गतिविधियों को उन्होंने बदलाव का संकेत बताया। उन्होंने दावा किया कि करोड़ों लोग गरीबी से बाहर आए हैं और कानून-व्यवस्था पहले से बेहतर हुई है।
कानून-व्यवस्था और पुराने दौर पर टिप्पणी
योगी ने कहा कि पहले प्रदेश में अपराध का डर था, व्यापारी और आम लोग असुरक्षित महसूस करते थे। उन्होंने इसे पिछली सरकारों की नीतियों से जोड़ा। उनका कहना था कि पिछले 9 सालों में हालात बदले हैं और प्रशासन मजबूत हुआ है। इसी दौरान उन्होंने सांस्कृतिक मुद्दों को भी जोड़ दिया, जिससे बहस और तेज हो गई।
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विपक्ष का पलटवार
विपक्ष ने तुरंत जवाब दिया। सपा और कांग्रेस के नेताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री असली मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश कर रहे हैं। उनका आरोप था कि बेरोजगारी और महंगाई जैसे सवालों से बचने के लिए भावनात्मक मुद्दे उठाए जा रहे हैं। सदन में बहस का स्तर इतना बढ़ गया कि स्पीकर सतीश महाना को कई बार दखल देना पड़ा।
मिशन 2027 की झलक?
राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि यह सिर्फ भाषण नहीं था, बल्कि आने वाले चुनावों की तैयारी का संकेत भी था। विकास और राष्ट्रवाद को साथ रखकर भाजपा अपनी रणनीति मजबूत करना चाहती है। मुख्यमंत्री ने अंत में एक शेर पढ़कर विपक्ष पर तंज कसा। साफ है कि विधानसभा की यह बहस आने वाले दिनों में भी सियासी चर्चा का बड़ा मुद्दा बनी रहेगी।