उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने महिला सुरक्षा के क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम की है. भारत सरकार के इंवेस्टिगेशन ट्रैकिंग सिस्टम फॉर सेक्सुअल अफेंस की जून 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश ने बड़े राज्यों में महिला संबंधी यौन उत्पीड़न के मामलों के निपटारे में प्रथम स्थान प्राप्त किया है.
निस्तारण दर में शीर्ष स्थान
21 अप्रैल 2018 से 3 जून 2025 तक की अवधि में उत्तर प्रदेश में कुल 1,22,130 एफआईआर दर्ज की गईं, जिनमें से 98.6% मामलों का निस्तारण किया गया. यह प्रदर्शन दिल्ली (97.6%) और हरियाणा (97.2%) से भी बेहतर है. 2018 में प्रदेश की निस्तारण दर 95% थी, जो अब शीर्ष स्थान पर पहुंच गई है.
चार्जशीट दाखिल करने में भी अग्रणी
60 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करने की दर में उत्तर प्रदेश ने 80.6% के साथ तीसरा स्थान प्राप्त किया है. बड़े राज्यों में यह दर सबसे अधिक है, जबकि 2018 में प्रदेश इस रैंकिंग में दसवें स्थान पर था.
पेंडेंसी दर में ऐतिहासिक गिरावट
उत्तर प्रदेश की पेंडेंसी दर केवल 0.2% है, जो इसे देश में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला राज्य बनाती है. मणिपुर, तमिलनाडु, बिहार की पेंडेंसी दर क्रमशः 65.7%, 58.0% और 34.5% है. 2018 में प्रदेश इस रैंकिंग में सातवें स्थान पर था.
महिला पुलिस अधिकारियों की सक्रियता
उत्तर प्रदेश की महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन (WCSO) की नोडल अधिकारी पद्मजा चौहान के नेतृत्व में मिशन शक्ति पहल को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है. महिला पुलिस अधिकारियों ने महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए उत्तर प्रदेश के मॉडल को प्रस्तुत किया. इस पहल में महिला हेल्प डेस्क की स्थापना, समयबद्ध जांच प्रोटोकॉल और अभियोजन दर में सुधार जैसे कदम शामिल हैं.
1090 महिला पावरलाइन: एक राष्ट्रीय प्रेरणा
उत्तर प्रदेश की 1090 महिला पावरलाइन को राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रेरणास्त्रोत के रूप में प्रस्तुत किया गया है. यह हेल्पलाइन प्रतिदिन 8,000 से अधिक कॉल प्राप्त करती है और पीड़ितों को त्वरित सहायता प्रदान करती है. यह तकनीकी रूप से उन्नत और सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण के लिए सराही गई है.
मुख्यमंत्री का नेतृत्व और भविष्य की दिशा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को यौन उत्पीड़न संबंधी मामलों की पेंडेंसी को शून्य करने के निर्देश दिए हैं. प्रदेश में महिला और बाल सुरक्षा संगठन द्वारा हर महीने मामलों की समीक्षा की जाती है और जिलों और कमिश्नरेट स्तर पर अधिकारियों द्वारा पॉक्सो मामलों की कड़ी निगरानी की जाती है.
उत्तर प्रदेश की यह उपलब्धि महिला सुरक्षा के क्षेत्र में एक नई दिशा और प्रेरणा प्रदान करती है. यह दर्शाता है कि जब सरकार, पुलिस और समाज मिलकर प्रयास करते हैं, तो सकारात्मक बदलाव संभव है.