उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव भले दूर हों, लेकिन Yogi Adityanath ने अभी से पूरी मशीनरी को एक्टिव कर दिया है। पंचायती राज विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री के तेवर साफ दिखे। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में कहा कि कोई भी लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। गांव से जुड़ी हर योजना जमीन पर दिखनी चाहिए, सिर्फ फाइलों में नहीं। संदेश साफ था कि पंचायत चुनाव से पहले गांव की तस्वीर बदलनी है।
योजनाओं पर जीरो टॉलरेंस
मुख्यमंत्री ने पंचायतों में चल रही योजनाओं की टाइमलाइन तय करने के निर्देश दिए। सड़क, पानी, शौचालय, सफाई और तालाबों की स्थिति पर खास फोकस रखा गया। योगी ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन हो या अन्य ग्रामीण योजनाएं, हर काम का असर ग्रामीणों को खुद महसूस होना चाहिए। एक भी शिकायत आने पर जिम्मेदारी तय होगी। पारदर्शिता और गुणवत्ता पर जोर देते हुए उन्होंने साफ किया कि काम दिखेगा तभी भरोसा बनेगा।
पढ़ाई और डिजिटल गांव
योगी के मास्टर प्लान में गांव की शिक्षा को अहम जगह दी गई है। प्रदेश की हजारों ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी बनाने का काम तेज किया गया है। किताबें, फर्नीचर और कंप्यूटर की व्यवस्था को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार चाहती है कि गांव के बच्चे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए शहरों पर निर्भर न रहें। यह कदम सीधे तौर पर युवाओं और अभिभावकों को जोड़ने की रणनीति माना जा रहा है।
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सर्दी, सड़क और सख्ती
मुख्यमंत्री ने सर्दी को देखते हुए रैन बसेरों और अलाव की व्यवस्था पर भी अफसरों को अलर्ट रहने को कहा। गांवों की सड़कों को गड्ढा मुक्त रखने और बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त करने का आदेश दिया गया है। योगी ने साफ कहा कि गरीब, बुजुर्ग, महिलाएं और मजदूर सुरक्षित महसूस करें, यही असली विकास है। इसी सख्ती को पंचायत चुनाव से पहले योगी का मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है, जिसने विपक्ष की बेचैनी बढ़ा दी है।