बरेली में इन दिनों रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया जा रहा है। यह कार्रवाई सीएम योगी के सख्त निर्देश पर की जा रही है। जिले में 15 दिनों का एक विशेष अभियान शुरू हुआ है, जिसमें पुलिस की 58 टीमें सुबह-शाम अलग-अलग इलाकों में जाकर संदिग्ध लोगों की जांच कर रही हैं। दो दिनों में पुलिस को 45 ऐसे लोग मिले हैं, जो अवैध रूप से भारत में रह रहे थे। खबरों की मानें तो बरेली जिले में सीएम योगी के नेतृत्व में 15 दिन का विशेष अभियान चलाया जा रहा है। जिसमें अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ बड़ा अभियान किया गया है। इस अभियान में अब तक दो दिनों में ही पुलिस ने 45 संदिग्ध विदेशी नागरिकों को पकड़ा है, जो बिना वैध दस्तावेजों के भारत में रह रहे थे।
58 पुलिस टीमें कर रही जांच
58 पुलिस की टीम ने जिले के करीब 100 स्थानों पर जाकर लगभग 1000 लोगों की जांच की है। यह लोग झुग्गियों, तंबुओं और अस्थायी डेरों में रह रहे थे। पुलिस अब इनकी नागरिकता की जांच करेगी और जिनकी पहचान विदेशी नागरिकों के रूप में होगी, उन्हें डिटेंशन सेंटर भेजा जाएगा। इसके बाद गृह मंत्रालय की गाइडलाइन के अनुसार इन्हें वापस भेजा जाएगा। पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार, सबसे ज्यादा घुसपैठिए भोजीपुरा थाना क्षेत्र से पकड़े गए हैं, जहां 11 लोग चिह्नित हुए हैं।
किन इलाकों से पकड़े गए घुसपैठिए
सबसे ज्यादा घुसपैठिए भोजीपुरा थाना क्षेत्र से पकड़े गए हैं, जहां 11 संदिग्ध मिले हैं। इसके अलावा विशारतगंज से 1, भमोरा से 5, फरीदपुर से 2, बहेड़ी से 3, शीशगढ़ से 8, और देवरनियां व शेरगढ़ से 4-4 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। ये सभी लोग बिना किसी वैध पहचान पत्र के रह रहे थे।
जिले के हर थाने में बनी विशेष टीमें
हर थाने में विशेष टीम बनाई गई है, जिन्हें पूरा ब्रीफ किया गया है। इस अभियान की निगरानी खुद एएसपी और सीओ स्तर के अधिकारी कर रहे हैं। एसएसपी ने साफ कहा है कि जो लोग अवैध रूप से बरेली में रह रहे हैं, उन्हें किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। खासकर जो लोग झुग्गियों या तंबुओं में अस्थायी तौर पर रह रहे हैं, उनकी पहचान और सत्यापन तय समय पर पूरा किया जाएगा, इसके बाद आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
क्या है बरेली पुलिस का लक्ष्य
पुलिस का लक्ष्य है कि बहुत साफ है विशेष अभियान के अंतर्गत जिले में रह रहे सभी घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें बाहर करना है। जिनके पास कोई वैध पहचान पत्र या दस्तावेज नहीं हैं, उन्हें डिटेंशन सेंटर में भेजा जाएगा। गृह मंत्रालय की गाइडलाइन के अनुसार ही इन पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय लोग भी प्रशासन को सहयोग कर रहे हैं और अपने इलाके में रह रहे संदिग्ध लोगों की सूचना पुलिस को दे रहे हैं।