लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में आम लोगों को बड़ी राहत देने वाला फैसला लिया गया। अब परिवार के सदस्यों के बीच अचल संपत्ति के दान पर स्टाम्प शुल्क सिर्फ पांच हजार रुपये तक सीमित रहेगा। खास बात यह है कि पहले यह सुविधा केवल कृषि और आवासीय संपत्तियों तक थी, लेकिन अब व्यावसायिक और औद्योगिक संपत्तियां भी इसके दायरे में आ गई हैं। इससे परिवारों में संपत्ति ट्रांसफर आसान होगा और कानूनी विवाद कम होने की उम्मीद है।
पहले कितना देना पड़ता था स्टाम्प शुल्क
भारतीय स्टाम्प अधिनियम के तहत दान विलेख पर संपत्ति के मूल्य के अनुसार शुल्क देना पड़ता था। शहरों में कमर्शियल प्रॉपर्टी पर सात प्रतिशत और गांवों में पांच प्रतिशत स्टाम्प शुल्क लगता था। वर्ष 2023 में पारिवारिक दान पर इसे अधिकतम पांच हजार रुपये किया गया था, लेकिन वह केवल सीमित श्रेणियों तक लागू था। अब योगी कैबिनेट के फैसले से शहर हो या गांव, हर तरह की पारिवारिक संपत्ति पर यही नियम लागू होगा।
रिश्तों की परिभाषा भी साफ
सरकार ने इस फैसले के साथ रिश्तेदारों की स्पष्ट परिभाषा भी तय कर दी है, ताकि नियमों के पालन में किसी तरह का भ्रम न रहे। अधिसूचना के राजपत्र में प्रकाशित होते ही यह फैसला लागू हो जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे पारिवारिक संपत्तियों का वैधानिक हस्तांतरण बढ़ेगा और कोर्ट-कचहरी के चक्कर कम होंगे।
स्टाम्प विभाग से जुड़े अन्य फैसले
कैबिनेट बैठक में स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग से जुड़े दो और प्रस्तावों को मंजूरी मिली। कुशीनगर के कप्तानगंज में उप निबंधक कार्यालय के लिए नई जमीन दी जाएगी, क्योंकि मौजूदा भवन जर्जर हालत में है। वहीं झांसी में उप निबंधक कार्यालय सदर और अभिलेखागार के निर्माण के लिए भी भूमि आवंटन को हरी झंडी दी गई है। इन दोनों परियोजनाओं में स्टाम्प और पंजीकरण शुल्क पूरी तरह माफ रहेगा।
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जीसीसी नीति को मिली मंजूरी
कैबिनेट का दूसरा बड़ा फैसला उत्तर प्रदेश को ग्लोबल सर्विस हब बनाने की दिशा में है। यूपी ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर नीति 2024 की नियमावली 2025 को मंजूरी दे दी गई है। इसके तहत इन्वेस्ट यूपी को नोडल एजेंसी बनाया गया है। सरकार के अनुसार अब तक 21 कंपनियां इस नीति के तहत निवेश शुरू कर चुकी हैं।
निवेश और रोजगार को मिलेगा फायदा
जीसीसी नीति के जरिए आईटी, रिसर्च, फाइनेंस, डिजाइन और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में उच्च कौशल वाले रोजगार बढ़ेंगे। इसमें भूमि सब्सिडी, स्टाम्प ड्यूटी छूट, पूंजी और ब्याज सब्सिडी जैसी सुविधाएं शामिल हैं। सरकार का दावा है कि इन फैसलों से उत्तर प्रदेश में निवेश को नई रफ्तार और युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।