इटावा में कथावाचकों के साथ हुई मारपीट का मामला अब तूल पकड़ चुका है और धीरे-धीरे सामाजिक तनाव का रूप लेता जा रहा है. ब्राह्मण बनाम यादव की इस बहस ने गुरुवार को उस समय हिंसक रूप ले लिया, जब बकेवर थाने के बाहर अहीर रेजिमेंट और यादव संगठनों के सैकड़ों लोग विरोध प्रदर्शन करने पहुंचे. प्रदर्शन के दौरान हालात बेकाबू हो गए, जिससे पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हो गई. भीड़ ने पुलिस पर पथराव किया. जिसके जवाब में पुलिस को हवाई फायरिंग करनी पड़ी. इस हिंसा के बाद इलाके में तनाव फैल गया, जिसके चलते भारी पुलिस बल तैनात किया गया. पुलिस ने 19 उपद्रवियों को गिरफ्तार कर लिया है और 13 वाहनों को सीज किया गया है.
छापेमारी और गिरफ्तारी की कार्रवाई जारी
पुलिस ने बताया कि प्रदर्शन में शामिल कई उपद्रवियों की पहचान वीडियो फुटेज के जरिए की जा रही है और उनकी तलाश में लगातार छापेमारी हो रही है. जानकारी मिली है कि प्रदर्शन में आसपास के जिलों से भी लोग जुटे थे. राजनीतिक स्तर पर भी इस मामले की गूंज सुनाई देने लगी है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सरकार और प्रशासन पर इस पूरे प्रकरण को लेकर निशाना साधा है.
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
21 जून को कथावाचक मुकुटमणि यादव और संत सिंह यादव एक धार्मिक कथा के लिए इटावा पहुंचे थे. आरोप है कि जब स्थानीय लोगों को पता चला कि कथावाचक ब्राह्मण नहीं, बल्कि यादव समुदाय से हैं, तो गुस्साई भीड़ ने उनके साथ मारपीट की. सिर मुंडवा दिया और उन पर पेशाब तक फेंका गया. यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिससे मामला गरमाया. इस घटना के बाद चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था.
कथावाचकों पर भी दर्ज हुई FIR
विवाद के बीच एक नया मोड़ तब आया जब एक महिला ने कथावाचकों पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया. इसके साथ ही कथावाचकों पर जाति छिपाने और फर्जी पहचान देने का भी आरोप है.
शिकायत के आधार पर पुलिस ने दोनों कथावाचकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है. एसएसपी बृजेश श्रीवास्तव ने बताया कि मामला गंभीर है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है.
यह पूरा घटनाक्रम इटावा में सामाजिक तानातानी को उजागर कर रहा है, जहां धार्मिक पहचान, जातिगत भावना और राजनीति का मिला-जुला असर साफ नजर आ रहा है.