ऐसे ही नहीं योगी को गरीबों का मसीहा कहा जाता है क्योंकि योगी ऐसे कड़े और बड़े फैसले लेते हैं जिसकी गूंज पूरे देश में सुनाई देती है चाहे बुलडोजर मॉडल की बात हो या फिर कानून व्यवस्था की बात हो. विकास में तो यूपी को अब तेजी से आगे बढ़ रहा है लेकिन इस बीच गरीबों का हक मारने वाले अवैध घुसपैठियों पर योगी ने ऐसी टेढ़ी नजर की है जिसने सूबे में हड़कंप मचा कर रख दिया है, बरेली से लेकर कानपुर, लखनऊ में रहने वाले घुसपैठियों का योगी राज में कमरतोड़ इलाज शुरू कर दिया है. इतना ही नहीं UP के जिन-जिन इलाकों में अवैध घुसपैठियों ने सालों से कब्जा किया था उनकी धर-पकड़ भी योगी के फैसले से तेज हो गई है.
बरेली बना अवैध घुसपैठियों का अड्डा !
खबरों की मानें तो अब तक सबसे ज्यादा अवैध घुसपैठिये बरेली से पकड़े गए है, जिसके पीछे की वजह भी है दरअसल बरेली जिला UP का एक प्रमुख औद्योगिक और व्यापारिक केंद्र है. साथ ही इससे सटे जिले पीलीभीत की सीमाएं नेपाल से सटी हैं. जिसके कारण घुसपैठियों के छिपने लिए बरेली एक मुफीद जगह है. कुछ लोगों का मानना है कि बरेली में सस्ते लेबर की उपलब्धता, रेल और सड़क नेटवर्क की सुगमता, और घनी आबादी के बीच छिपने की सुविधा के कारण घुसपैठिए यहां पहुंचते हैं. कई घुसपैठिए नकली आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों का उपयोग कर झुग्गी-झोपड़ियों में रह रहे हैं.
बरेली में पकड़े गए सबसे ज्यादा बांग्लादेशी
पुलिस के अनुसार, भोजीपुरा, सीबीगंज और बहेड़ी जैसे क्षेत्रों में सबसे ज्यादा संदिग्ध मिले हैं, जहां 26 और 14 संदिग्धों की पहचान की गई. इसके साथ ही पीलीभीत, बदायूं और शाहजहांपुर में भी घुसपैठिए बस्तियों में रह रहे हैं. इन जिलों में घुसपैठिए ज्यादातर मजदूरी, छोटे-मोटे व्यापार या घरेलू कामों में लगे हुए हैं. पुलिस का कहना है कि कई घुसपैठिए नकली दस्तावेजों के जरिए स्थानीय निवासियों के बीच घुलमिल गए हैं. पीलीभीत और बदायूं में सीमा से सटे होने के कारण घुसपैठ आसान हो जाती है, जिसके लिए योगी फोर्स अब एक्टिव मोड में है और संदिग्धों की पहचान और सत्यापन में जुटी हैं.
संदिग्ध बस्तियों की हो रही निगरानी
बता दें पुलिस और इंटेलिजेंस ब्यूरो लगातार संदिग्ध बस्तियों की निगरानी कर रही हैं, डाटा बेस तैयार किया जा रहा है. इसके साथ ही ऑटो, रिक्शा और रेहड़ी-ठेला वालों की भी जांच की जा रही है. जिसपर भी अफसरों को शक हो रहा है उससे पूछताछ कर रहे हैं, बता ये अभियान इसलिए भी जरूरी है क्योंकि भारत के कई हिस्सों में लगभग 40,000 रोहिंग्या मुसलमान बिना किसी दस्तावेज के शरणार्थी के रूप में रह रहे हैं. जिनकी धरपकड़ के लिए योगी ने निंजा टेक्निक अपनाई हुई है.