Teacher Vote Bank in UP: उत्तर प्रदेश में शिक्षक केवल शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ नहीं माने जाते, बल्कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी समाज में जनमत तैयार करने वाले प्रभावशाली वर्ग के रूप में भी उनकी पहचान है। यही वजह है कि राज्य की राजनीति में शिक्षकों की भूमिका हमेशा अहम रही है। पिछले तीन महीनों में योगी आदित्यनाथ सरकार ने शिक्षकों, शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के लिए कई बड़ी योजनाओं और राहत पैकेजों की घोषणा की है, जिन्हें राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
शिक्षक समुदाय का बड़ा सामाजिक और चुनावी प्रभाव
बेसिक शिक्षा परिषद के अंतर्गत प्रदेश में लगभग 5 से 6 लाख नियमित शिक्षक कार्यरत हैं। इसके अलावा करीब 1.5 लाख शिक्षामित्र, 25 हजार अंशकालिक अनुदेशक तथा माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक और कर्मचारी भी शिक्षा तंत्र का हिस्सा हैं। यदि सेवानिवृत्त शिक्षकों और उनके परिवारों को भी जोड़ा जाए, तो यह प्रभाव 30 से 40 लाख वोटों तक पहुंचने का अनुमान लगाया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षक आज भी सम्मानित माने जाते हैं और चुनाव के समय उनकी राय को गंभीरता से सुना जाता है।
सरकार की नई योजनाएं और राहत पैकेज
जुलाई 2026 में मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना शुरू की गई, जिसके तहत शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और रसोइयों को प्रति परिवार सालाना ₹5 लाख तक मुफ्त इलाज की सुविधा देने की घोषणा की गई है। इसके साथ भारतीय स्टेट बैंक के सहयोग से नियमित शिक्षकों के लिए ₹1 करोड़ तक का दुर्घटना बीमा कवर तय किया गया है, जबकि संविदा कर्मियों के लिए अलग-अलग श्रेणियों में बीमा राशि निर्धारित की गई है। सरकार ने अंशकालिक अनुदेशकों का मानदेय ₹9,000 से बढ़ाकर ₹17,000 प्रतिमाह कर दिया है, जिसे 1 अप्रैल 2026 से लागू माना गया है।
TET, भर्ती और प्रशासनिक फैसलों पर फोकस
सरकार ने सेवा में कार्यरत शिक्षकों के लिए अलग शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) आयोजित करने की तैयारी के संकेत दिए हैं, ताकि उन्हें नए अभ्यर्थियों के साथ प्रतिस्पर्धा का सामना न करना पड़े। साथ ही UPTET में शामिल होने वाले शिक्षकों को विशेष अवकाश देने की बात भी कही गई है। शहरी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को देखते हुए 10 हजार से अधिक पदों पर भर्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी भी की जा रही है।
पुरानी पेंशन और डिजिटल हाजिरी अब भी चुनौती
इन घोषणाओं के बावजूद शिक्षकों की कुछ प्रमुख मांगें अब भी लंबित हैं। पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाली का मुद्दा शिक्षक संगठनों की सबसे बड़ी मांग बना हुआ है। वहीं शिक्षामित्रों का नियमितीकरण भी वर्षों से विवाद का विषय है। हाल में लागू तबादला नीति और डिजिटल हाजिरी व्यवस्था का कई जिलों में विरोध देखने को मिला है। शिक्षकों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट और आवागमन की समस्याओं के कारण ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराना व्यावहारिक नहीं है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार की नई घोषणाएं शिक्षकों की नाराजगी को कितनी हद तक कम कर पाती हैं और आगामी चुनावी माहौल में इसका क्या असर पड़ता है।