Yogi government: उत्तर प्रदेश सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस नीति के तहत बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। राज्य में जिन सरकारी कर्मचारियों ने अब तक अपनी चल-अचल संपत्ति का विवरण जमा नहीं किया है, उनकी सैलरी रोक दी गई है। इस कार्रवाई की जद में कुल 68 हजार से ज्यादा कर्मचारी आए हैं। सरकार का साफ संदेश है कि पारदर्शिता में लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सरकारी आदेश की अनदेखी पड़ी भारी
योगी सरकार ने सभी राज्य कर्मचारियों को निर्देश दिया था कि वे 31 जनवरी तक अपनी संपत्ति का पूरा ब्योरा मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड करें। इसके लिए सभी विभागों के नोडल अधिकारी और आहरण-वितरण अधिकारियों को भी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। बावजूद इसके हजारों कर्मचारियों ने तय समयसीमा तक विवरण नहीं दिया, जिसके बाद सैलरी रोकने का आदेश लागू कर दिया गया।
किन श्रेणियों के कर्मचारी शामिल
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक संपत्ति विवरण न देने वालों में सबसे अधिक संख्या तृतीय श्रेणी कर्मचारियों की है, जिनकी गिनती करीब 34,926 है। इसके अलावा चतुर्थ श्रेणी के 22,624, द्वितीय श्रेणी के 7,204 और प्रथम श्रेणी के 2,628 अधिकारी शामिल हैं। अन्य संवर्गों के भी सैकड़ों कर्मचारियों पर यह कार्रवाई की गई है।
इन विभागों पर पड़ा ज्यादा असर
लोक निर्माण, राजस्व, बेसिक और माध्यमिक शिक्षा, स्वास्थ्य, समाज कल्याण, महिला कल्याण, परिवहन, सहकारिता और खाद्य रसद जैसे बड़े विभागों में सबसे ज्यादा कर्मचारियों ने समय पर विवरण नहीं दिया। इन विभागों में कुल कर्मचारियों के करीब आठ प्रतिशत लोग अब सैलरी रुकने की स्थिति में हैं।
सरकार का साफ संदेश
मुख्य सचिव स्तर से पहले ही स्पष्ट कर दिया गया था कि नियमों का पालन अनिवार्य है। सरकार का मानना है कि संपत्ति विवरण की पारदर्शिता से भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी। जिन कर्मचारियों ने अभी तक जानकारी नहीं दी है, उन्हें सैलरी पाने के लिए पहले संपत्ति का पूरा ब्यौरा देना होगा। इस कदम को प्रशासनिक सख्ती और जवाबदेही की दिशा में अहम माना जा रहा है।