लखनऊ। प्रदेश की योगी सरकार युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। प्रदेश भर में संचालित कौशल विकास केंद्रों के माध्यम से युवाओं को न केवल कुशल बनाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा, बल्कि उन्हें रोजगार दिलाने के साथ-साथ स्वरोजगार के लिए भी प्रेरित किया जाएगा। इस पहल के तहत मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान (सीएम-युवा) योजना को कौशल विकास कार्यक्रमों से जोड़ा जा रहा है, जिससे प्रशिक्षित युवा सीधे उद्यमिता की राह पर चल सकें।
सरकार की इस योजना का मुख्य उद्देश्य बेरोजगार युवाओं को नौकरी की तलाश से हटाकर खुद का व्यवसाय शुरू करने के लिए सशक्त बनाना है। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के तहत चल रहे केंद्रों में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। इन केंद्रों में विभिन्न ट्रेडों जैसे विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना, एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) प्रशिक्षण, अनुसूचित जाति/जनजाति/पिछड़ा वर्ग प्रशिक्षण और कौशल उन्नयन कार्यक्रमों से जुड़े युवा सीएम-युवा योजना के पात्र होंगे।योजना के तहत पहले चरण में युवाओं को 5 लाख रुपये तक का पूर्णतः ब्याजमुक्त और बिना गारंटी के ऋण उपलब्ध कराया जाएगा।
यह ऋण उद्योग एवं सेवा क्षेत्र की सूक्ष्म इकाइयों की स्थापना के लिए दिया जाएगा। इसके अलावा, परियोजना लागत पर 10 प्रतिशत मार्जिन मनी अनुदान भी प्रदान किया जाएगा। सफलतापूर्वक पहले ऋण की अदायगी के बाद दूसरे चरण में आगे 10 से 20 लाख रुपये तक का अतिरिक्त ऋण दिलाने की व्यवस्था की जाएगी, जिससे युवा अपने व्यवसाय को विस्तार दे सकें। पात्रता के लिए आवेदक की आयु 21 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए, न्यूनतम 8वीं पास होना अनिवार्य है तथा किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से कौशल प्रशिक्षण प्रमाणपत्र आवश्यक है।
योजना का लक्ष्य प्रतिवर्ष 1 लाख युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ना है, जिससे अगले 10 वर्षों में 10 लाख नए उद्यमी तैयार होंगे। इससे न केवल युवा आत्मनिर्भर बनेंगे, बल्कि ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में लाखों नए रोजगार सृजन होंगे। योगी सरकार की इस पहल से प्रदेश में सूक्ष्म उद्योगों की क्रांति आने की उम्मीद है। कौशल विकास और वित्तीय सहायता का यह संयोजन युवाओं को नौकरी मांगने वाले से नौकरी देने वाला बनाने में मील का पत्थर साबित होगा। आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है और इच्छुक युवा एमएसएमई पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।