Yogi Government: उत्तर प्रदेश सरकार ने किराएदारों और मकान मालिकों के बीच बढ़ते विवादों को कम करने और किरायेदारी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार ने रेंट एग्रीमेंट पर लगने वाली स्टाम्प ड्यूटी में भारी कटौती का निर्णय लिया है। पहले जहां औसत वार्षिक किराए का 2 से 4 प्रतिशत तक स्टाम्प शुल्क देना पड़ता था, वहीं अब यह खर्च काफी कम हो गया है। इससे रेंट एग्रीमेंट का रजिस्ट्रेशन आसान, सस्ता और सुरक्षित हो जाएगा।
500 से 1000 रुपये में होगा रेंट एग्रीमेंट रजिस्ट्रेशन
नए नियमों के अनुसार, यदि वार्षिक किराया 2 लाख रुपये तक है तो रेंट एग्रीमेंट पर केवल 500 रुपये की स्टाम्प ड्यूटी लगेगी। वहीं, 5 वर्ष की अवधि वाले एग्रीमेंट के लिए अधिकतम 1000 रुपये तक का शुल्क देना होगा। उच्च किराए (जैसे 5 लाख रुपये सालाना) पर भी 1000 रुपये की ही सीमा तय की गई है। पहले इसी श्रेणी के लिए 4000 रुपये तक स्टाम्प ड्यूटी लगती थी। एक वर्ष से अधिक अवधि वाले एग्रीमेंट पर न्यूनतम 500 रुपये से लेकर अधिकतम 20 हजार रुपये तक शुल्क रखा गया है। नया नियम लागू होने से लोग अब 100 रुपये के अनरजिस्टर्ड स्टाम्प पेपर पर समझौता करने से बचेंगे और कानूनी रूप से सुरक्षित रहेंगे।
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ई-रजिस्ट्रेशन और पारदर्शिता पर जोर
सरकार ने रेंट एग्रीमेंट के लिए एक अलग ऑनलाइन पोर्टल तैयार करने का फैसला किया है, जहां किरायेदार और मकान मालिक तय फॉर्मेट डाउनलोड कर ई-स्टाम्प पर चिपकाकर रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे। ई-रजिस्ट्रेशन से न केवल प्रक्रिया सरल होगी, बल्कि किरायेदारों का पता सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज रहेगा, जो अपराध नियंत्रण और जांच में भी मदद करेगा। वर्तमान में प्रदेश में करीब लाखों किरायेदार हैं, लेकिन केवल 86 हजार रेंट एग्रीमेंट ही रजिस्टर्ड हैं। कम स्टाम्प ड्यूटी से यह संख्या तेजी से बढ़ेगी। साथ ही, सरकार ने भूतपूर्व सैनिकों और दिव्यांगजनों को महिलाओं जैसी छूट देने की घोषणा भी की है। यह कदम उत्तर प्रदेश में “ईज ऑफ लिविंग” और सुरक्षित किरायेदारी को बढ़ावा देने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है।