लखनऊ। यूपी में महिलाओं की सुरक्षा और लैंगिक उत्पीड़न की स्थिति में योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति से उल्लेखनीय सुधार दिख रहा है। 2025 तक आईटीएसएसओ रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ अपराधों में डिस्पोजल रेट 98.6 परसेंट तक पहुंच गया है, जो राष्ट्रीय स्तर पर सबसे ऊपर है। पेंडेंसी दर मात्र 0.2 परसेंट रह गई है, जबकि 2018 में यह 95 परसेंट थी।
स्टॉकिंग जैसी शिकायतें 60 परसेंट तक घटी
मिशन शक्ति के तहत हेल्पलाइन, वन स्टॉप सेंटर और सख्त कार्रवाई से सार्वजनिक स्थानों पर उत्पीड़न, स्टॉकिंग जैसी शिकायतें 60 परसेंट तक घटी हैं। एनसीआरबी और अन्य डेटा में यूपी का महिलाओं के खिलाफ अपराध दर राष्ट्रीय औसत से कम (58.6 प्रति लाख) है।पाेस एक्ट के अनुपालन में आईसीसी गठन और सी बाक्स पोर्टल से कार्यस्थल सुरक्षा मजबूत हुई है। हालांकि, अंडर-रिपोर्टिंग की चुनौती बनी हुई है, लेकिन तेज जांच, सजा और जागरूकता से स्थिति बेहतर हुई है, जिससे महिलाओं का भरोसा बढ़ा है।
राष्ट्रीय स्तर पर आए 400-450 मामले
एनसीआरबी डेटा (2020-2024) के अनुसार कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के राष्ट्रीय स्तर पर औसतन 400-450 मामले सालाना दर्ज होते हैं, जिसमें उत्तर प्रदेश का योगदान महत्वपूर्ण है लेकिन कुल महिलाओं के खिलाफ अपराधों में कार्यस्थल मामले कम हैं। 2020-2022 में कुल महिलाओं के खिलाफ अपराधों में यूपी ने 49,385 से 65,743 मामले दर्ज किए। योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति से अपराधों की डिस्पोजल रेट 98.6 परसेंट तक पहुंची है, जिसमें महिलाओं के खिलाफ अपराधों में सबसे कम पेंडेंसी (0.2 प्रतिशत) है। कार्रवाई में तेज एफाआईआर दर्जी, चार्जशीट दाखिल (80.6 प्रतिशत अनुपालन) और सजा सुनिश्चित की जाती है।
24 जुलाई 2025 को योगी सरकार ने पोस एक्ट की धारा 4 के अनुपालन में निदेशालय स्तर पर आंतरिक परिवाद समिति का गठन किया। यह सरकारी विभागों, निदेशालयों और संबंधित संस्थानों में महिलाओं की शिकायतों के लिए अनिवार्य था, ताकि निष्पक्ष जांच और समाधान सुनिश्चित हो। यह कदम राज्य स्तर पर आईसीसी को गठन को मजबूत करने और सी बाक्स पोर्टल से जुड़ने का हिस्सा था।
समिति में प्राप्त शिकायतें और समाधान
निदेशालय स्तर की समिति में 2025 में प्राप्त शिकायतों की सटीक संख्या सार्वजनिक रूप से सीमित है, लेकिन पोस अनुपालन रिपोर्ट्स और संबंधित विभागों से जुड़े आंकड़ों से ज्यादातर मामलों में शून्य या न्यूनतम शिकायतें दर्ज हुईं, क्योंकि जागरूकता और रोकथाम पर फोकस किया गया है। जहां शिकायतें आईं, वे तेजी से जांच के अधीन रखी गईं। राष्ट्रीय स्तर पर पाेस मामलों में रिजॉल्यूशन में सुधार दिखा, लेकिन यूपी में सरकारी स्तर पर पेंडेंसी न्यूनतम रही। कई विभागों में वार्षिक रिपोर्ट में 'जीरो केस' दर्ज किए गए, जबकि प्राप्त मामलों का अधिकांश समाधान (सस्पेंशन, ट्रांसफर, सजा) किया गया। योगी सरकार ने पोस अनुपालन, जागरूकता और तेज कार्रवाई से कार्यस्थल सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। हालांकि, रिपोर्टिंग बढ़ाने और निजी क्षेत्र में अनुपालन सुनिश्चित करने की चुनौती बनी हुई है। कुल मिलाकर, डिस्पोजल रेट में राष्ट्रीय शीर्ष स्थान यूपी की प्रतिबद्धता दर्शाता है।