अमित शाह के साथ SIR को लेकर हुई चर्चा के बाद यूपी में अचानक माहौल बदल गया है। आदेश साफ है मतदाता सूची में एक भी गलत वोटर नहीं रहना चाहिए। जैसे ही ये संकेत मिले, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तुरंत एक्टिव मोड में आ गए और पूरे प्रशासन को अगले 7 दिन सुपर-फास्ट मोड में काम करने के निर्देश दे दिए। प्रमुख सचिव से लेकर डीएम, एसपी और जिला निर्वाचन अधिकारी सभी को साफ कहा गया कि 4 दिसंबर की डेडलाइन के भीतर हर घर की जांच पूरी होनी चाहिए। इसके बाद पूरे प्रदेश में BLO टीमें दिन-रात फॉर्म बांटने और कलेक्शन में जुट गई हैं। चुनावी हलकों में इसे आने वाले चुनावों से पहले “सबसे बड़ा वोटर क्लीन-अप” बताया जा रहा है।
SIR को लेकर बढ़ा दबाव
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सभी जिलाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर दी है और आदेश दिया है कि जहां भी देरी हुई, वहां अधिकारी से लेकर BLO तक सस्पेंशन की कार्रवाई होगी। दावा किया गया है कि 15.44 करोड़ मतदाताओं में से 99.57% को फॉर्म बांटे जा चुके हैं, लेकिन कई जिलों में अभी भी शिकायतें आ रही हैं। सरकार की नजर खासकर उन इलाकों पर है जहां फर्जी वोटर, डुप्लीकेट पहचान, शिफ्टेड मतदाता और अवैध रूप से रह रहे लोग बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। यही वजह है कि योगी सरकार ने इसे “मिशन मोड” में डाल दिया है और आदेश दिया है कि एक भी गलत नाम वोटर लिस्ट में बचा नहीं रहना चाहिए।
क्यों परेशान हो रहे मौलाना?
SIR की तेजी से कई इलाकों में बेचैनी बढ़ी है, विशेषकर उन जगहों पर जहाँ बड़ी संख्या में बिना दस्तावेज वाले लोग या बार-बार शिफ्ट हुए परिवार रहते हैं। कई मौलानाओं और धार्मिक संगठनों ने आशंका जताई है कि इस ड्राइव का असर कुछ खास समुदायों पर अधिक पड़ सकता है। विपक्ष भी आरोप लगा रहा है कि यह अभियान टारगेटेड तरीके से चल रहा है। वहीं सरकार का कहना है कि यह सिर्फ कानूनन प्रक्रिया है और किसी के खिलाफ भेदभाव नहीं होगा
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4 दिसंबर से पहले क्यों बड़ा है ये हफ्ता?
अगले 7 दिन यूपी के लिए बेहद अहम हैं, क्योंकि 4 दिसंबर SIR की आखिरी तारीख है। इसी लिस्ट के आधार पर तय होगा किसका नाम रहेगा, किसका हटेगा, कौन वैध है, कौन अवैध, कौन डबल वोटर है और किन दस्तावेजों पर सवाल उठेंगे। सरकार इसे सिर्फ पुनरीक्षण नहीं बल्कि एक बड़ा प्रशासनिक सुधार मान रही है, जिसका असर सीधे आने वाले चुनावों पर पड़ेगा।