बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में यूपी के दो बड़े चेहरे योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव आमने-सामने दिखे। एक तरफ योगी की रैलियों में भीड़ उमड़ती रही और दूसरी तरफ अखिलेश यादव महागठबंधन को बचाने की आखिरी उम्मीद बनकर बिहार पहुंचे। योगी ने बिहार में 31 विशाल जनसभाएं कीं और उनमें से 27 सीटों पर NDA को जीत मिली। यानि करीब 87% का स्ट्राइक रेट। वहीं अखिलेश यादव ने 25 सीटों पर लगातार 8 दिन प्रचार किया, लेकिन उनकी मेहनत सिर्फ 4 सीटों पर ही काम आई। इस लिहाज़ से स्ट्राइक रेट रहा मात्र 16%, जो योगी के सामने बेहद कमजोर साबित हुआ।
कहां मिला फायदा और कहां मिली हार?
अब सवाल यह कि अखिलेश यादव जिन 25 सीटों पर सभा करने गए, वहां कौन–सी सीट कांग्रेस-महागठबंधन के हाथ आईं? इन 25 में से सिर्फ 4 सीटें ही राजद जीत पाई रघुनाथपुर, बोधगया, रफीगंज और बिस्फी। इन चार में सबसे बड़ी चर्चा रघुनाथपुर सीट की रही, जहां शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा शहाब ने NDA की हवा ही निकाल दी। इस सीट पर योगी भी प्रचार करने गए थे और शाह भी, लेकिन NDA का उम्मीदवार फिसड्डी साबित हुआ। यहां अखिलेश की सभा से माहौल जरूर गरमाया और इसका फायदा ओसामा को मिला। लेकिन बाकी 21 सीटों पर अखिलेश की हवा नहीं चली और NDA भारी अंतर से जीत गया।
अखिलेश की नाराजगी- हार का ठीकरा SIR पर
जब नतीजे आए तो अखिलेश यादव ने हार का जिम्मेदार खुद को नहीं, बल्कि SIR नाम की नई चुनावी साजिश को बताया। उन्होंने कहा कि बिहार में “SIR ने खेल कर दिया” और चुनाव फिक्स हुआ। अखिलेश ने चेतावनी दी कि अब यूपी, बंगाल और तमिलनाडु में ये खेल नहीं चल पाएगा। सपा प्रमुख ने एक्स पर लिखा कि अब “PPTV यानी PDA प्रहरी” हर बूथ पर नजर रखेगा और बीजेपी की बेईमानी रोकने के लिए तैयार रहेगा। यह बयान इस बात का संकेत था कि इस चुनाव में हार से महागठबंधन कितनी गहरी चोट खा चुका है।
नतीजा क्या- योगी आगे, अखिलेश पीछे ?
बिहार चुनावी मैदान में अंतिम तस्वीर साफ दिखी जहां योगी गए, वहां NDA की जीत तय होती गई, और जहां अखिलेश गए वहां भीड़ तो जरूर जुटी लेकिन जीत नहीं मिल सकी। योगी की सभाओं की भीड़ ने चुनावी हवा ही बदल दी, जबकि अखिलेश सिर्फ 4 सीटें ही बचा पाए। सबसे बड़ा असर रघुनाथपुर पर दिखा, जहां ओसामा शहाब की जीत अखिलेश की सबसे बड़ी उपलब्धि बताई गई। लेकिन कुल मिलाकर मुकाबले का स्कोर यही रहा योगी भारी पड़े और अखिलेश पिछड़ गए।