Yogini Ekadashi 2026: सनातन धर्म में योगिनी एकादशी का व्रत भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। आषाढ़ कृष्ण पक्ष की एकादशी पर रखा जाने वाला यह व्रत पापों से मुक्ति, सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है। हर वर्ष तिथि को लेकर श्रद्धालुओं के मन में भ्रम की स्थिति बन जाती है कि व्रत किस दिन रखा जाए। ऐसे में पंचांग के अनुसार सही तिथि और व्रत के नियमों की जानकारी होना आवश्यक है। आइए जानते हैं योगिनी एकादशी से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें और किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
योगिनी एकादशी की सही तिथि कैसे तय होती है?
एकादशी व्रत की तिथि का निर्धारण उदया तिथि के आधार पर किया जाता है। यदि एकादशी तिथि सूर्योदय के समय विद्यमान रहती है, तो उसी दिन व्रत रखा जाता है। तिथि के आरंभ और समाप्ति के समय के कारण कई बार अलग-अलग पंचांगों में 9 और 10 जुलाई का उल्लेख देखने को मिलता है। इसलिए व्रत रखने से पहले अपने क्षेत्र के मान्य पंचांग या विद्वान आचार्य की सलाह अवश्य लेनी चाहिए, ताकि धार्मिक नियमों के अनुसार व्रत का पूर्ण फल प्राप्त हो सके।
योगिनी एकादशी का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार योगिनी एकादशी का व्रत करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह व्रत जीवन में किए गए अनेक दोषों और पापों से मुक्ति दिलाने वाला माना गया है। साथ ही आर्थिक कठिनाइयों, मानसिक तनाव और पारिवारिक समस्याओं से राहत मिलने की भी मान्यता है। श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया यह व्रत व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
व्रत और पूजा के दौरान रखें इन बातों का ध्यान
योगिनी एकादशी के दिन प्रातःकाल स्नान के बाद भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करें। उन्हें पीले पुष्प, तुलसी दल, फल और पंचामृत अर्पित करें। पूरे दिन सात्विक आचरण रखें, क्रोध और नकारात्मक विचारों से बचें तथा यथासंभव भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें। व्रत के दौरान लहसुन, प्याज, मांसाहार और तामसिक भोजन से दूर रहना चाहिए। यदि संभव हो तो गरीब और जरूरतमंद लोगों को अन्न या वस्त्र का दान भी करें।
पारण का समय भी है उतना ही महत्वपूर्ण
एकादशी व्रत का पूरा फल तभी प्राप्त होता है, जब द्वादशी तिथि में विधि-विधान से पारण किया जाए। पारण निर्धारित समय में करने की परंपरा है, इसलिए इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। व्रत समाप्त करने से पहले भगवान विष्णु की आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धा, संयम और नियमों का पालन करते हुए रखा गया योगिनी एकादशी व्रत व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है।