Demographic Dividend : स्वतंत्रता दिवस के मौके पर RSS प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर स्थित संघ मुख्यालय में तिरंगा फहराया। इस दौरान उन्होंने देश की आजादी, सुरक्षा और समृद्धि को लेकर अपनी बात रखी। भागवत ने कहा कि भारत स्वतंत्र था, स्वतंत्र है और आगे भी स्वतंत्र रहेगा, लेकिन देश को सुरक्षित, समृद्ध और विश्व में प्रभावशाली बनाने के लिए कई चुनौतियों का सामना करना होगा।
युवाओं को बताया डेमोग्राफिक डिविडेंड
मोहन भागवत ने देश की युवा आबादी को भारत की बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि युवा देश का डेमोग्राफिक डिविडेंड हैं। अगर युवाओं की क्षमता और ऊर्जा का सही इस्तेमाल किया गया तो इससे देश को बड़ा फायदा मिल सकता है। लेकिन यदि उन्हें सही दिशा और अवसर नहीं मिले तो यही आबादी समाज के लिए बोझ में बदल सकती है। उनके इस बयान ने युवाओं की भूमिका और जिम्मेदारी पर ध्यान खींचा।
विश्वगुरु बनने की रखी बात
भागवत ने कहा कि भारत को ऐसा राष्ट्र बनाना होगा जो केवल अपने लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए सार्थक योगदान दे। उन्होंने कहा कि देश को सुखी, संपन्न और सुरक्षित बनाना सभी की जिम्मेदारी है। भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए समाज के हर वर्ग को अपनी भूमिका निभानी होगी और देश के सामने मौजूद चुनौतियों का मिलकर सामना करना होगा।
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मूल सिद्धांतों से जुड़े रहने पर जोर
RSS प्रमुख ने कहा कि देश के सामने अलग-अलग तरह की विचारधाराएं और चुनौतियां मौजूद हैं। ऐसे समय में भारत को अपने मूल सिद्धांतों से जुड़े रहते हुए आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए समाज को एकजुट होकर देश की प्रगति और सुरक्षा के लिए काम करना चाहिए। उनका कहना था कि मजबूत और जिम्मेदार राष्ट्र का निर्माण सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
लोकतंत्र में विरोध जरूरी बताया
मोहन भागवत ने लोकतंत्र में अलग-अलग विचारों के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश में अलग विचार होना लोकतंत्र की पहचान है और जनता के हित से जुड़े सवालों को मजबूती से उठाया जाना चाहिए। विरोध और आंदोलन भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा हैं, लेकिन इनके साथ जिम्मेदारियों का ध्यान रखना जरूरी है। उन्होंने संविधान निर्माण के दौरान बाबा साहेब डॉ. बीआर अंबेडकर की सोच का जिक्र करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अधिकारों के साथ कर्तव्यों को भी समझना जरूरी है।