नोएडा, सेक्टर-145 स्थित डंपिंग यार्ड में बैग के अंदर मिली युवती की लाश की शिनाख्त अब तक नहीं हो सकी है. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है और दिल्ली से नोएडा की ओर आने वाले कूड़ा डंपरों व अन्य वाहनों पर विशेष नजर रखनी शुरू कर दी है. इसके लिए आईएस टीएमएस (इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम) का सहारा लिया जा रहा है। इससे पहले भी सिरकटी लाश के मामले में आईएस टीएमएस से पुलिस को अहम सुराग मिले थे.
पुलिस की ओर से डंपिंग यार्ड में शहर के अलग-अलग हिस्सों से कूड़ा लेकर आने-जाने वाले वाहनों का डाटा जुटाया जा रहा है। नोएडा में कूड़ा उठाने की जिम्मेदारी एजी एनवायरो कंपनी की है और उनके सभी वाहन जीपीएस ट्रैक पर रहते हैं। पुलिस ने वाहन चालकों को बैग का फोटो दिखाकर पूछताछ शुरू कर दी है.
सोमवार को पुलिस ने दिल्ली-नोएडा सीमा पर स्थित हरि दर्शन बार्डर के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। इसके अलावा झुंडपुरा बार्डर, कालिंदी कुंज और डीएनडी बार्डर की फुटेज भी चेक की गई है। जांच के दौरान कुछ कूड़ा गाड़ियां संदिग्ध पाई गई हैं, जिनके वाहन नंबर के आधार पर पुलिस आगे की कार्रवाई कर रही है.
शव को छिपाने के लिए जिस बैग का इस्तेमाल किया गया है, वह थोक सामान या औद्योगिक माल ढुलाई में प्रयुक्त होने वाला प्रतीत हो रहा है। वहीं युवती के हाथ-पैर बांधने में इस्तेमाल की गई चार से पांच इंच चौड़ी सफेद पट्टी भी औद्योगिक इकाइयों में इस्तेमाल होने वाले सामान की ओर इशारा कर रही है। इससे आशंका जताई जा रही है कि हत्यारोपी का संबंध किसी फैक्ट्री या औद्योगिक क्षेत्र से हो सकता है.
डंपिंग यार्ड में प्रवेश के लिए केवल एक ही गेट है। ऐसे में पुलिस को शक है कि शव कूड़े के डंपर के जरिए ही यार्ड तक पहुंचा या फिर किसी ने सुनसान का फायदा उठाकर वहां फेंक दिया. कोतवाली प्रभारी विनोद कुमार मिश्र ने बताया कि पुलिस की छह टीमें शव की शिनाख्त और आरोपियों की तलाश में जुटी हैं। हर पहलू पर गंभीरता से जांच की जा रही है और जल्द ही मामले का खुलासा किया जाएगा. यह घटना एक बार फिर नोएडा में सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। पुलिस का कहना है कि आईएस टीएमएस और जीपीएस ट्रैकिंग के जरिए जल्द ही आरोपी तक पहुंचा जाएगा.