बांग्लादेश की अंतरिम सरकार एक बार फिर गंभीर राजनीतिक संकट के घेरे में है। शेख हसीना के बाद सत्ता संभालने वाले मोहम्मद यूनुस को अब उसी युवा शक्ति से चुनौती मिल रही है, जिसने उन्हें नेतृत्व सौंपा था। इंकलाब मंच ने अपने प्रमुख नेता उस्मान हादी की हत्या के मामले में न्याय न मिलने पर यूनुस सरकार को सत्ता छोड़ने की चेतावनी दी है, जिससे ढाका में फिर उबाल के हालात बनते दिख रहे हैं।
उस्मान हादी हत्या से भड़का इंकलाब मंच
इंकलाब मंच के प्रवक्ता और चर्चित युवा नेता उस्मान हादी की निर्मम हत्या के दो हफ्ते बीत जाने के बावजूद हत्यारों का सुराग नहीं लग पाया है। इसी बात से नाराज संगठन ने सरकार पर सीधा हमला बोला है। मंच का कहना है कि सरकार या तो अपराधियों को बचा रही है या फिर प्रशासन पूरी तरह नाकाम हो चुका है। इस हत्या ने खासकर युवाओं में गुस्सा और असंतोष को और गहरा कर दिया है।
“न्याय नहीं तो सत्ता से बेदखली”
सोमवार को हुई इंकलाब मंच की अहम बैठक और आपात प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार को साफ अल्टीमेटम दिया गया। मंच के नेताओं ने कहा कि यदि उस्मान हादी के कातिलों की तत्काल गिरफ्तारी नहीं हुई, तो वे अंतरिम सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए आंदोलन छेड़ देंगे। मंच ने यह भी कहा, “हम सरकार बनाना जानते हैं, तो सरकार गिराना भी जानते हैं।”
यूनुस सरकार के लिए खतरे की घंटी
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह चेतावनी मोहम्मद यूनुस के लिए बेहद गंभीर है। बांग्लादेश के हालिया इतिहास में छात्र और युवा आंदोलनों ने कई बार सत्ता की दिशा बदल दी है। इंकलाब मंच का आरोप है कि जिस सरकार को कानून का राज स्थापित करने के लिए लाया गया था, वह अपने ही समर्थकों की सुरक्षा करने में विफल साबित हो रही है।
गृह सलाहकार और पुलिस पर सवाल
इंकलाब मंच ने गृह सलाहकार और पुलिस प्रशासन की भूमिका पर भी तीखे सवाल उठाए हैं। संगठन का आरोप है कि सुराग होने के बावजूद पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है। मंच ने आशंका जताई कि या तो प्रशासन में पुराने शासन के समर्थक अब भी सक्रिय हैं, या फिर मौजूदा सरकार दबाव में आकर ढिलाई बरत रही है।
क्या फिर सुलगेगा बांग्लादेश?
इंकलाब मंच ने साफ किया है कि मांगें पूरी न होने पर वह सरकारी कामकाज ठप करेगा, प्रमुख इमारतों का घेराव करेगा और देशव्यापी आंदोलन चलाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह आंदोलन सड़कों पर उतरता है, तो अन्य असंतुष्ट गुट भी साथ आ सकते हैं। ऐसे में बांग्लादेश एक बार फिर राजनीतिक अस्थिरता और अराजकता की ओर बढ़ सकता है।