CM Yogi in Sonipat: अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संत, संन्यासी और सनातन धर्म को लेकर सख्त और स्पष्ट संदेश दिया है। हरियाणा के सोनीपत में आयोजित एक कार्यक्रम में सीएम योगी ने कहा कि संन्यासी और संत के लिए धर्म सर्वोपरि होता है। संन्यासी की कोई व्यक्तिगत संपत्ति नहीं होती, उसका स्वाभिमान राष्ट्र से जुड़ा होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग धर्म की आड़ में सनातन को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं और ऐसे “कालनेमि” समाज को गुमराह कर रहे हैं।
राम मंदिर से बदली तस्वीर
मुख्यमंत्री योगी ने अपने संबोधन में अयोध्या राम मंदिर का उदाहरण देते हुए कहा कि एक समय राम मंदिर का निर्माण केवल कल्पना माना जाता था, लेकिन मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और सही नेतृत्व के कारण आज वहां रामलला विराजमान हैं। उन्होंने कहा कि जब सरकार स्पष्ट नीयत के साथ काम करती है, तो असंभव दिखने वाले कार्य भी संभव हो जाते हैं।
प्रयागराज और आस्था की शक्ति
सीएम योगी ने प्रयागराज के माघ मेले का उल्लेख करते हुए बताया कि मौनी अमावस्या के दिन करीब साढ़े चार करोड़ श्रद्धालुओं ने संगम में स्नान किया। उन्होंने कहा कि यह संख्या कई देशों की कुल आबादी से भी ज्यादा है। यह भारत की आस्था, संत परंपरा और सुव्यवस्थित नेतृत्व की शक्ति को दर्शाता है। योगी ने कहा कि आने वाले हजार वर्षों तक भारत और सनातन की गूंज दुनिया में सुनाई देनी चाहिए।
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युवाओं से तय होता है देश का भविष्य
अपने भाषण में मुख्यमंत्री ने युवाओं की भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी देश का भविष्य वहां के युवाओं की सोच और संकल्प से तय होता है। अगर युवाओं के मन में देश और समाज के लिए कुछ करने की भावना है, तो उस देश का भविष्य उज्ज्वल होता है। निराश और हताश युवा किसी भी समाज को आगे नहीं बढ़ा सकते।
सनातन और राष्ट्र का संदेश
सीएम योगी ने अंत में कहा कि भारत का मार्ग बल या दबाव से नहीं, बल्कि संस्कार और आचरण से दुनिया को दिशा दिखाने का है। संत, संन्यासी और समाज मिलकर इस जिम्मेदारी को निभाएं, यही भारत की पहचान और शक्ति है।